धनबाद: भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने गैर-विनियमित क्षेत्र में उपलब्ध कोयले की कीमतों में संशोधन किया है। इसका असर ई-ऑक्शन के जरिए कोयला खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। कीमतों में बढ़ोतरी से स्टील और स्पंज आयरन उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने की संभावना है।
सालाना 150 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व का अनुमान
संशोधित दरों के तहत विभिन्न श्रेणियों के कोयले की कीमतों में लगभग 0.1 से 14 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इससे कंपनी को सालाना करीब 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। यह बदलाव केवल गैर-विनियमित क्षेत्र पर लागू होगा, सभी श्रेणियों के कोयले पर नहीं।
कोयले के ग्रेड में गड़बड़ी रोकने पर जोर
कंपनी को ई-ऑक्शन में निर्धारित ग्रेड और वास्तविक कोयला उठाव के बीच अंतर से संबंधित गड़बड़ियों की जानकारी मिल रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, वाशरी ग्रेड-4 और ग्रेड-5 की कीमतों में करीब 650 रुपये प्रति टन का अंतर है। नई मूल्य व्यवस्था से ग्रेड के अंतर का अनुचित लाभ उठाने की संभावनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्टील और स्पंज आयरन इकाइयों पर असर
BCCL का कोकिंग कोयला इस्पात उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है। कीमतें बढ़ने से गैर-विनियमित क्षेत्र से कोयला खरीदने वाली इकाइयों का खर्च बढ़ सकता है। इसका वास्तविक असर उद्योगों की खपत और बढ़ी हुई लागत को समायोजित करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
BCCL हर साल गैर-विनियमित क्षेत्र के लिए करीब 150 लाख टन कोयला खुले बाजार में ई-ऑक्शन के माध्यम से उपलब्ध कराती है। संशोधित दरों से कंपनी को अतिरिक्त आय मिलने के साथ मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद है।
















