भूली/धनबाद: महाअष्टमी के अवसर पर भूली बस्ती में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति का अनोखा नजारा देखने को मिला। बस्ती के सातों टोलों से महिला, पुरुष और बच्चों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु करीब 500 मीटर तक साष्टांग दंडवत करते हुए कुम्हार टोला स्थित दुर्गा मंडप पहुंचे और मां की पूजा-अर्चना की।
परंपरा के अनुसार, श्रद्धालुओं ने पहले रवानी टोला स्थित तालाब में स्नान किया। इसके बाद कलश में पवित्र जल लेकर दंडवत करते हुए दुर्गा मंडप तक पहुंचे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और मन्नत पूरी होने की कामना के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, झरिया के एक राजा ने यहां दुर्गा पूजा की शुरुआत कराई थी। पहले खपरैलनुमा मंडप में पूजा होती थी, जबकि वर्ष 1985 में स्थायी दुर्गा मंडप का निर्माण पूरा हुआ।
इस पूजा की खासियत यह भी है कि एक ही परिवार के वंशज पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा संपन्न कराते आ रहे हैं। वहीं, बलियापुर का एक परिवार मां दुर्गा समेत अन्य प्रतिमाओं का निर्माण करता है। महानवमी पर सात बलि देने की पारंपरिक प्रथा भी निभाई जाती है।
समय के साथ बदलाव के बावजूद भूली बस्ती में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा आज भी कायम है।
















