धनबाद : झारखंड ई-रिक्शा टोटो संघ ने धनबाद रेलवे स्टेशन के दक्षिणी छोर स्थित रेलवे पार्किंग के संचालन में कथित अनियमितताओं को लेकर शुक्रवार को गांधी सेवा सदन में प्रेस वार्ता आयोजित कर रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। संघ ने आरोप लगाया कि डीआरएम को लिखित शिकायत और साक्ष्य सौंपे जाने के करीब 15 दिन बाद भी संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
संघ के संरक्षक वैभव सिन्हा ने बताया कि 2 जुलाई 2026 को मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) की अध्यक्षता में हुई बैठक में रेलवे अधिकारियों, पार्किंग ठेकेदार और संघ के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अनियमितताओं के साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया था। इसके बाद संघ ने अनुबंध की शर्तों के कथित उल्लंघन, पार्किंग रसीदों और फोटोग्राफ सहित विस्तृत शिकायत रेलवे प्रशासन को सौंप दी।
संघ का आरोप है कि पार्किंग स्थल पर अब भी अनुबंध की कई शर्तों का पालन नहीं हो रहा है। इनमें ई-रिक्शा चालकों से कथित मनमानी वसूली, पार्किंग शुल्क बोर्ड और हेल्पलाइन नंबर का अभाव, सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाना, बिना पहचान-पत्र कर्मचारियों द्वारा शुल्क वसूली, कंप्यूटरीकृत रसीद जारी नहीं करना, पार्किंग क्षेत्र का सीमांकन नहीं करना और दिव्यांगों के लिए आरक्षित पार्किंग की व्यवस्था नहीं होना शामिल है।
संघ ने डीएवी स्कूल–पुराना बाजार रोड स्थित पार्किंग परिसर में जलजमाव, गंदगी और रखरखाव की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई। साथ ही आरोप लगाया कि वहां सब्जी विक्रेताओं से कथित रूप से धन वसूला जा रहा है और रेलवे की भूमि का अनुबंध के विपरीत उपयोग किया जा रहा है। संघ ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
संघ ने कहा कि यदि शिकायतों और उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे संबंधित अधिकारियों और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वह मामले को रेलवे बोर्ड, पूर्व मध्य रेलवे, रेलवे सतर्कता, श्रम विभाग सहित अन्य सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष उठाने के साथ-साथ लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन भी करेगा।
(नोट: यह समाचार झारखंड ई-रिक्शा टोटो संघ द्वारा प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित रेलवे प्रशासन या ठेकेदार का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।)
















