धनबाद: धनबाद-बोकारो की लाइफलाइन मानी जाने वाली केंदुआडीह धंसान प्रभावित सड़क की सुरक्षा को लेकर अब वैज्ञानिक स्तर पर कार्रवाई शुरू होने जा रही है। सड़क के नीचे की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए करीब 30 मीटर गहराई तक वैज्ञानिक खुदाई की जाएगी। खुदाई और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही यह निर्णय लिया जाएगा कि सड़क आम लोगों और वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए IIT-ISM धनबाद, CSIR-CIMFR, DGMS और BCCL के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने भूमिगत खनन के नक्शों के अध्ययन में पता चला है कि राष्ट्रीयकरण से पहले इस क्षेत्र के नीचे 13वें कोयला सीम में खनन किया गया था। यह खनन क्षेत्र सड़क के नीचे लगभग 30 मीटर गहराई और करीब 45 मीटर के दायरे में फैला हुआ है।
SOP के मुताबिक आवश्यकता पड़ने पर खुदाई के दौरान नियंत्रित ब्लास्टिंग भी की जाएगी। ब्लास्टिंग से पहले 500 मीटर तक सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा और इस दायरे में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। सभी सुरक्षा मानकों का पालन करने के बाद ही विस्फोट की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि SOP के अनुरूप खुदाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। खुदाई पूरी होने के बाद BCCL के विशेषज्ञ विस्तृत तकनीकी जांच करेंगे। यदि जांच में भविष्य में किसी प्रकार का खतरा नहीं पाया गया, तभी सड़क निर्माण एजेंसी (RCD) को सड़क पुनर्निर्माण का कार्य शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
गौरतलब है कि इसी वर्ष केंदुआडीह स्थित पुराने NH-32 पर अचानक सड़क धंसने और चौड़ी दरारें पड़ने के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इस मार्ग पर यातायात बंद कर दिया था। जमीन से गैस रिसाव की आशंका के कारण वाहनों का परिचालन वैकल्पिक मार्गों से कराया जा रहा है। पिछले वर्ष इसी क्षेत्र में गैस रिसाव की घटना में तीन लोगों की मौत भी हुई थी। इसके बाद सड़क को दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर कई आंदोलन हुए थे। अब SOP तैयार होने के बाद लोगों की निगाहें वैज्ञानिक खुदाई और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं।
















