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कतरास में भू-धंसान के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन रुका, ग्रामीणों ने पुनर्वास और सुरक्षा की उठाई मांग

JP Bharat Shareकतरास: बाघमारा अंचल के कतरास छाताबाद में भू-धंसान के बाद जमींदोज हुए क्षेत्र में शनिवार को प्रस्तावित रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका। प्रभावित ग्रामीणों ने बचाव कार्य शुरू करने से पहले क्षेत्र की सुरक्षा, उचित पुनर्वास और भू-धंसान के कारणों की जांच की मांग करते हुए रेस्क्यू टीम को रोक दिया। ग्रामीणों…

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कतरास: बाघमारा अंचल के कतरास छाताबाद में भू-धंसान के बाद जमींदोज हुए क्षेत्र में शनिवार को प्रस्तावित रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका। प्रभावित ग्रामीणों ने बचाव कार्य शुरू करने से पहले क्षेत्र की सुरक्षा, उचित पुनर्वास और भू-धंसान के कारणों की जांच की मांग करते हुए रेस्क्यू टीम को रोक दिया।

ग्रामीणों के विरोध के कारण न्यू आकाशकिनारी कोलियरी की जीटीए आउटसोर्सिंग परियोजना का काम भी ठप करा दिया गया। आंदोलन के चलते कतरास-फुलारीटांड़ मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इससे आवागमन प्रभावित हुआ।

घटना की सूचना मिलने के बाद कतरास थाना प्रभारी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। स्थिति को देखते हुए सीआईएसएफ के जवानों को भी तैनात किया गया। पुलिस और सुरक्षा बलों ने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

पुनर्वास को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की ठोस व्यवस्था किए बिना रेस्क्यू या अन्य कार्रवाई शुरू करना उचित नहीं होगा। लोगों ने प्रशासन से पहले प्रभावित इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करने और घटना के कारणों की गंभीरता से जांच कराने की मांग की।

इधर, भू-धंसान के बाद खतरे की आशंका को देखते हुए आसपास रहने वाले कई लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालने में जुट गए हैं। लोगों में लगातार भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

सांसद ढुलू महतो ने अवैध खनन को बताया जिम्मेदार

धनबाद सांसद ढुलू महतो ने घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने भू-धंसान के लिए अवैध खनन को जिम्मेदार बताते हुए सरकार से प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की।

वहीं कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष जलेश्वर महतो ने इस घटना के लिए बीसीसीएल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को करीब 30 किलोमीटर दूर बेलगड़िया में पुनर्वासित करना व्यावहारिक समाधान नहीं है। उनका कहना है कि प्रभावित लोगों की स्थानीय परिस्थितियों और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।

फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनी हुई है। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों के साथ बातचीत कर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कराने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।


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