रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित अनियमितता और नियुक्ति घोटाले के मामले में आरोपी अभय तिवारी की जमानत याचिका पर रांची की अदालत में सुनवाई पूरी हो गई है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के अंतिम आदेश का इंतजार है।
CID ने अभय तिवारी को बताया मुख्य आरोपी
मामले की जांच कर रही CID के अनुसार, अभय तिवारी कथित तौर पर पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना है। जांच एजेंसी के मुताबिक वह परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुका है।
आरोप है कि उसने अपने रिश्तेदारों और कई अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कथित तौर पर बड़ी रकम वसूली। CID के कांड संख्या 16/2026 की जांच के दौरान इस मामले में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है।
पूर्व JPSC चेयरमैन से कथित कनेक्शन
मामले में JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते की गिरफ्तारी के बाद जांच ने और तूल पकड़ा। CID के अनुसार, अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान में परीक्षा संचालन के लिए TDPL एजेंसी के चयन में तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका का जिक्र सामने आया है।
जांच एजेंसी इस बयान को मामले की अहम कड़ी मान रही है और इसके आधार पर परीक्षा संचालन से लेकर कथित अनियमितताओं तक पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
जमानत पर फैसला सुरक्षित
3 सितंबर को CID की ओर से अदालत में दलीलें रखी गई थीं। इसके बाद बचाव पक्ष ने भी अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अभय तिवारी की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
अब अदालत के आदेश से तय होगा कि अभय तिवारी को जमानत मिलती है या उनकी न्यायिक हिरासत आगे जारी रहती है।
















