नई दिल्ली/बेंगलुरु: भारत की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। नागरिक उड्डयन, रक्षा अनुसंधान, पदार्थ विज्ञान और स्वदेशी तकनीकी विकास में उनके योगदान ने देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
14 मई 1954 को जन्मी डॉ. अय्यंगार ने बेंगलुरु विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक और परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की। अपने शैक्षणिक जीवन में उन्होंने कई स्वर्ण पदक और छात्रवृत्तियां हासिल कीं। बाद में उन्होंने सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (NAL), बेंगलुरु में वैज्ञानिक के रूप में 46 वर्षों तक कार्य करते हुए अनेक महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास किया।
उनका शुरुआती शोध पदार्थ विज्ञान और थर्मो-फिजिकल उपकरणों के विकास पर केंद्रित था। उन्होंने ऐसे उपकरण विकसित किए, जिनकी मदद से उच्च तापमान और उच्च दाब की परिस्थितियों में उन्नत पदार्थों का अध्ययन संभव हो सका। उनके अनुसंधान ने भारत में वैज्ञानिक उपकरणों के स्वदेशी विकास को नई दिशा दी और विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम की।
डॉ. अय्यंगार द्वारा विकसित ‘दृष्टि-विज़िबिलिटी मेज़रिंग सिस्टम’ और ‘एविएशन वेदर ऑब्जर्वेशन सिस्टम’ आज देश के कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में उपयोग किए जा रहे हैं। इन प्रणालियों ने विमानन सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और कई वैश्विक संस्थाओं ने उन्हें मान्यता प्रदान की।
रक्षा क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने मिसाइल कार्यक्रमों तथा रैमजेट और स्क्रैमजेट इंजन तकनीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटकों के विकास में भूमिका निभाई। उनके शोध और तकनीकी समाधान ने भारत की सामरिक और अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत बनाने में सहायता की है।
अपने लंबे वैज्ञानिक करियर में डॉ. अय्यंगार को 43 से अधिक राष्ट्रीय और संस्थागत पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इनमें सीएसआईआर यंग साइंटिस्ट अवार्ड, मेक इन इंडिया राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं। उनके कार्यों को वैज्ञानिक समुदाय, रक्षा संस्थानों और सरकारी एजेंसियों द्वारा व्यापक सराहना मिली है।
पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया जाना उनके दशकों लंबे समर्पण, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में योगदान की बड़ी पहचान माना जा रहा है।
















