नई दिल्ली/हैदराबाद: देश के प्रसिद्ध आनुवंशिकी वैज्ञानिक डॉ. कुमारासामी थंगराज को जनसंख्या और चिकित्सा आनुवंशिकी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। मानव जीनोमिक्स, दुर्लभ आनुवंशिक रोगों और भारतीय आबादी की आनुवंशिक संरचना पर उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता मिली है।
2 जून 1963 को जन्मे डॉ. थंगराज ने मद्रास विश्वविद्यालय से आनुवंशिकी में उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB), हैदराबाद में वैज्ञानिक के रूप में अपना करियर शुरू किया। अपने लंबे वैज्ञानिक जीवन में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं का नेतृत्व किया और देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
डॉ. थंगराज का सबसे चर्चित शोध भारतीय उपमहाद्वीप की आनुवंशिक उत्पत्ति और मानव प्रवासन से जुड़ा रहा है। उनके अध्ययन ने यह स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि अंडमान की जनजातियां प्रारंभिक आधुनिक मानव प्रवास से जुड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके शोध ने भारतीय समाज की आनुवंशिक विविधता और एकता को समझने में नई दिशा प्रदान की।
उन्होंने भारतीय आबादी की आनुवंशिक संरचना, दुर्लभ रोगों और हृदय संबंधी आनुवंशिक जोखिमों पर भी महत्वपूर्ण अध्ययन किए हैं। उनके शोध निष्कर्षों का उपयोग चिकित्सा विज्ञान, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आनुवंशिक रोगों की पहचान में किया जा रहा है।
डॉ. थंगराज ने जीनोम इंडिया मिशन और दुर्लभ आनुवंशिक रोगों से संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाने के लिए कई पहल शुरू कीं, जिससे आनुवंशिक रोगों के निदान और उपचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हुईं।
उनके नाम 300 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं, जो दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके कई शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में चर्चा का विषय बने और मानव आनुवंशिकी के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए।
डॉ. थंगराज को अपने करियर में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार, विज्ञान श्री सम्मान, जेसी बोस फेलोशिप, सीएसआईआर भटनागर फेलोशिप, सन फार्मा रिसर्च अवार्ड सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया जाना उनके वैज्ञानिक योगदान और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका का बड़ा सम्मान माना जा रहा है।
















