श्रीकांत जी महाराज के जन्मोत्सव पर चुनार की ऐतिहासिक धरोहर पर आधारित पुस्तक की घोषणा

JP Bharat Shareवाराणसी, 29 अप्रैल 2026: काशी की पावन नगरी वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रीकांत जी महाराज के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में चुनार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत पर आधारित पुस्तक “CHUNAR…

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वाराणसी, 29 अप्रैल 2026: काशी की पावन नगरी वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रीकांत जी महाराज के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में चुनार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत पर आधारित पुस्तक “CHUNAR Temples, Fort and Zamindari Heritage” की औपचारिक घोषणा की गई।

यह पुस्तक एडवोकेट मनोहर दास अग्रवाल द्वारा लिखी गई है, जिसमें चुनार के प्राचीन शैव, शाक्त और वैष्णव मंदिरों, ऐतिहासिक चुनार किले, पवित्र घाटों तथा अग्रवाल जमींदारों की सामाजिक एवं परोपकारी विरासत का विस्तृत और प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य चुनार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया के पाठकों तक पहुंचाना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीकांत जी महाराज ने कहा कि पुस्तक का वर्तमान संस्करण अंग्रेज़ी भाषा में उपलब्ध है और इसे जल्द ही हिंदी में भी प्रकाशित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग चुनार की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत से परिचित हो सकें। उनके इस घोषणा का उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।

समारोह में यूनियन बैंक के जोनल हेड टी. कामेश्वर राव, सूर्या बल्ब्स एंड ट्यूब्स के विकास गोयल सहित अनेक गणमान्य नागरिक, संत-महात्मा, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने इस पुस्तक को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

इस अवसर पर रमेश कुमार अग्रवाल, विष्णु कुमार अग्रवाल एवं डॉ. ऋतुराज अग्रवाल भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक चुनार की गौरवशाली विरासत, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम का समापन श्रद्धा, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक गौरव के वातावरण में हुआ। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए पुस्तक के हिंदी संस्करण के शीघ्र प्रकाशन की कामना की।


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