धनबाद में बड़ी कार्रवाई: विधानसभा समिति की पहल से सरकार को 220 करोड़ राजस्व, रैयतों को मिलेगा मुआवजा
विधानसभा विशेष समिति की बड़ी पहल
धनबाद जिले में खनन गतिविधियों से जुड़े भूमि उपयोग और राजस्व वसूली के मामले में झारखंड विधानसभा की प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण विशेष समिति की पहल रंग लाती दिखाई दे रही है। समिति के प्रयासों से राज्य सरकार को बड़ी राजस्व उपलब्धि हासिल हुई है और प्रभावित रैयतों को न्याय मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है।
समिति के सभापति एवं टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने बताया कि सरकारी जमीन के उपयोग के एवज में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने राज्य सरकार के खाते में 220 करोड़ रुपये जमा किए हैं। इसे राज्य के राजस्व हित में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
बीसीसीएल ने जमा किए 220 करोड़ रुपये
सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में समिति ने बीसीसीएल, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), आउटसोर्सिंग कंपनियों और संबंधित विभागों के साथ बैठक कर रैयती, सरकारी एवं वन भूमि पर खनन और ओवर बर्डन डंपिंग से जुड़े मामलों की समीक्षा की।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विभिन्न कोल कंपनियों ने वर्षों से सरकारी और रैयती जमीन का उपयोग खनन कार्यों के लिए किया है। इसी क्रम में बीसीसीएल ने सरकारी भूमि उपयोग के बदले 220 करोड़ रुपये का राजस्व राज्य सरकार को जमा कराया है।
एक हजार करोड़ से अधिक राजस्व मिलने की संभावना
मथुरा प्रसाद महतो ने बताया कि बीसीसीएल के बाद सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने भी सरकारी भूमि के उपयोग को स्वीकार किया है और राजस्व भुगतान पर सहमति जताई है।
समिति का अनुमान है कि आने वाले समय में राज्य सरकार को एक हजार करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। इससे राज्य के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
रैयतों को मिलेगा उचित मुआवजा
विशेष समिति ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य केवल राजस्व वसूली तक सीमित नहीं है। समिति उन रैयतों को भी न्याय दिलाना चाहती है जिनकी जमीन का उपयोग लंबे समय से खनन और ओवर बर्डन डंपिंग के लिए किया जा रहा है।
समिति यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि प्रभावित रैयतों को उनकी जमीन के बदले उचित मुआवजा मिले और लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो।
रैयतों को होने वाले संभावित लाभ
- भूमि उपयोग के बदले उचित मुआवजा
- लंबित मामलों की जांच में तेजी
- शिकायतों के समाधान के लिए प्रशासनिक पहल
- खनन कंपनियों की जवाबदेही तय होना
- भूमि अधिकारों की बेहतर सुरक्षा
- सुरंगा मामले के बाद बनी थी समिति
मथुरा प्रसाद महतो ने बताया कि लगभग नौ महीने पहले सिंदरी क्षेत्र के सुरंगा में एक आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा ओवर बर्डन डंपिंग का मामला सामने आया था। इसके बाद विधानसभा विशेष समिति का गठन किया गया।
समिति लगातार मामले की निगरानी कर रही है और जिला प्रशासन तथा बीसीसीएल को निर्देश दिए गए हैं कि रैयतों की समस्याओं का त्वरित और सरल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
विधायकों ने क्या कहा?
चंद्रदेव महतो
समिति के सदस्य एवं सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने कहा कि रैयतों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच झरिया और बलियापुर अंचल अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
अरूप चटर्जी
निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य राजस्व की हानि को रोकना और प्रभावित रैयतों को शीघ्र मुआवजा दिलाना है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच से छह दशकों में बिना अनुमति जिन सरकारी जमीनों का उपयोग खनन के लिए किया गया है, उसका आकलन कर संबंधित कंपनियों से राजस्व वसूला जाएगा।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?
समीक्षा बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी और सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्रमुख उपस्थित लोगों में शामिल थे:
- मथुरा प्रसाद महतो, सभापति एवं टुंडी विधायक
- चंद्रदेव महतो, सिंदरी विधायक
- अरूप चटर्जी, निरसा विधायक
- सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव
- एसडीएम लोकेश बारंगे
- अपर समाहर्ता विनोद कुमार
- जिला खनन पदाधिकारी रितेश राज तिग्गा
- बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल
- निदेशक तकनीकी संचालन संजय कुमार सिंह
- विभिन्न विभागों एवं आउटसोर्सिंग कंपनियों के प्रतिनिधि
निष्कर्ष
धनबाद खनन राजस्व वसूली 220 करोड़ का यह मामला राज्य सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विधानसभा विशेष समिति की सक्रियता से न केवल सरकारी राजस्व में वृद्धि हो रही है, बल्कि वर्षों से अपनी जमीन के बदले मुआवजे की मांग कर रहे रैयतों को भी न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। यदि सीसीएल और ईसीएल से भी राजस्व वसूली होती है, तो झारखंड सरकार को एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।
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