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साल भर बाद भी नहीं बना शहीद मनिंद्रनाथ मंडल तोरण द्वार, ग्रामीणों में नाराजगी

JP Bharat Shareधनबाद के कुसमाटांड़ में साल भर बाद भी नहीं बना शहीद मनिंद्रनाथ मंडल तोरण द्वार धनबाद: धनबाद जिले के कुसमाटांड़ में शहीद मनिंद्रनाथ मंडल की स्मृति में बना तोरण द्वार आज भी बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है। पिछले वर्ष एक अज्ञात वाहन की टक्कर से क्षतिग्रस्त हुआ यह द्वार अब तक पुनर्निर्माण…

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धनबाद के कुसमाटांड़ में साल भर बाद भी नहीं बना शहीद मनिंद्रनाथ मंडल तोरण द्वार

धनबाद:

धनबाद जिले के कुसमाटांड़ में शहीद मनिंद्रनाथ मंडल की स्मृति में बना तोरण द्वार आज भी बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है। पिछले वर्ष एक अज्ञात वाहन की टक्कर से क्षतिग्रस्त हुआ यह द्वार अब तक पुनर्निर्माण की प्रतीक्षा कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के बाद प्रशासन और संबंधित पक्ष की ओर से जल्द निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई।

वाहन की टक्कर से ध्वस्त हुआ था तोरण द्वार

जानकारी के अनुसार, पिछले साल एक अनियंत्रित वाहन ने कुसमाटांड़ स्थित शहीद मनिंद्रनाथ मंडल तोरण द्वार को टक्कर मार दी थी। हादसे में द्वार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला था। शहीद के सम्मान में लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन भी किया था।

हर्जाना मिलने के बाद भी निर्माण नहीं

राष्ट्रीय सुरेश समाज के संयोजक रणबीर मंडल ने बताया कि सड़क जाम के दौरान वाहन मालिक या संबंधित पक्ष द्वारा तोरण द्वार के पुनर्निर्माण के लिए हर्जाना देने पर सहमति बनी थी। इसके बाद समझौते के आधार पर आंदोलन समाप्त किया गया था।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुनर्निर्माण के लिए राशि मिल चुकी थी, तो अब तक निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हुआ।

“शहीद का अपमान बर्दाश्त नहीं”

रणबीर मंडल ने कहा कि शहीद मनिंद्रनाथ मंडल का तोरण द्वार लोगों की आस्था और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि राशि किसे मिली और निर्माण कार्य में देरी क्यों हो रही है।

फिर आंदोलन की चेतावनी

कुसमाटांड़ के ग्रामीण अब भी उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब शहीद का तोरण द्वार दोबारा बनकर तैयार होगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे फिर से आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।


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