रांची: झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने अपात्र राशन कार्डधारियों की पहचान कर उन्हें सूची से हटाने की प्रक्रिया फिर से शुरू करने की तैयारी कर ली है। विभागीय जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब आठ लाख राशन कार्डधारी ऐसे पाए गए हैं जो निर्धारित पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले लगभग तीन महीनों से यह प्रक्रिया विभिन्न कारणों से रुकी हुई थी, लेकिन अब इसे दोबारा गति देने की योजना बनाई जा रही है। यह कार्रवाई केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, जिन लाभुकों को अपात्र श्रेणी में चिह्नित किया गया है, उनकी पहचान निर्धारित मानकों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की गई है। इसी सूची के आधार पर आगे नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सरकार का मानना है कि राशन योजना का लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचना चाहिए। अपात्र लाभुकों के नाम हटने से पात्र परिवारों को खाद्यान्न वितरण में किसी प्रकार की बाधा नहीं होगी और योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा।
विभाग का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जी या गलत तरीके से लाभ ले रहे लोगों की पहचान करना और खाद्य सुरक्षा योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
राज्य सरकार की इस पहल पर अब सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे लाखों राशन कार्डधारियों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में लाभुकों को अपने दस्तावेजों और पात्रता संबंधी जानकारी को अद्यतन रखने की सलाह दी जा रही है।
















