केंदुआडीह भू-धंसान से बढ़ा खतरा
धनबाद जिले के केंदुआडीह क्षेत्र में भू-धंसान, सड़क धंसने और गैस रिसाव की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।
गुरुवार को उपायुक्त आदित्य रंजन, एसएसपी प्रभात कुमार और बीसीसीएल के सीएमडी मनोज अग्रवाल ने संयुक्त रूप से घटना स्थल का निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया।
अधिकारियों ने बताया भयावह हालात
निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने स्थिति को बेहद भयावह बताते हुए स्थानीय लोगों से तुरंत बेलगड़िया में शिफ्ट होने की अपील की।
धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क पर धंसान और आसपास के इलाकों का भी बारीकी से अध्ययन किया गया।
पाइपलाइन डायवर्ट करने का निर्देश
उपायुक्त ने बताया कि सड़क के नीचे बिछी पाइपलाइन को डायवर्ट करने के लिए माडा (MADA) को निर्देश दिए गए हैं।
जल्द ही नई रूट प्लानिंग के तहत पाइपलाइन को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा, क्योंकि इसी से बड़ी आबादी को पेयजल आपूर्ति होती है।
पहले से ही उच्च जोखिम वाला क्षेत्र
केंदुआडीह क्षेत्र पहले से ही अग्नि प्रभावित इलाका रहा है और अब गैस रिसाव व लगातार हो रहे भू-धंसान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
बीसीसीएल भी इस क्षेत्र को उच्च जोखिम वाला घोषित कर चुका है।
बेलगड़िया ही सुरक्षित विकल्प
प्रशासन ने साफ कहा है कि प्रभावित लोगों को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए।
👉 बेलगड़िया में पुनर्वास ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है
यहां दी जा रही सुविधाएं:
- बुनियादी सुविधाएं
- रोजगार के अवसर
- टेक्सटाइल इंडस्ट्री की तैयारी
- 535 परिवारों का पुनर्वास
पूर्व सर्वे के अनुसार 535 परिवारों को शिफ्ट करने की सूची बनाई गई थी।
लेकिन बढ़ती आबादी के कारण कई परिवार इससे बाहर रह गए हैं, जिन्हें अब पुनर्वास और मुआवजा देने पर विचार किया जा रहा है।
बीसीसीएल का बयान
सीएमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि अब लोगों के पास बेलगड़िया शिफ्ट होना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
बीसीसीएल द्वारा:
- CSR के तहत ई-रिक्शा (टोटो)
- कौशल विकास केंद्र
- बस सेवा
की सुविधा दी जा रही है।
स्थानीय प्रतिनिधि की मांग
पार्षद प्रतिनिधि गोविंदा राउत ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो लोग आसानी से पुनर्वास के लिए तैयार हो सकते हैं।
निष्कर्ष
केंदुआडीह की स्थिति अब प्रशासन और बीसीसीएल के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
एक ओर बढ़ता खतरा है तो दूसरी ओर लोगों की आजीविका की चिंता। अब यह देखना अहम होगा कि लोग कब तक सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट होते हैं।
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