धनबाद, 27 जुलाई: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के ओरिएंटेशन कार्यक्रम-2026 के तहत नवप्रवेशित यूजी, पीजी और पीएचडी छात्रों को देश के दो प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों से संवाद करने का अवसर मिला। इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के अध्यक्ष एवं प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. शेखर सी. मांडे तथा आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की आयुष विशिष्ट वैज्ञानिक चेयर और टीसीएस रिसर्च एंड इनोवेशन में लाइफ साइंसेज रिसर्च की सलाहकार डॉ. शर्मिला मांडे ने विज्ञान, शोध और नवाचार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
पेनमैन ऑडिटोरियम में आयोजित सत्रों में प्रो. शेखर सी. मांडे ने नवप्रवेशित स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान केवल करियर बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के विकास और मानवता की सेवा का प्रभावी साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से वैज्ञानिक ईमानदारी बनाए रखने, जिज्ञासु बने रहने तथा मौलिक शोध को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज जिस शोध का तत्काल उपयोग दिखाई नहीं देता, वही भविष्य में बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों की आधारशिला बन सकता है।
प्रो. मांडे ने पीएचडी शोधार्थियों के साथ विशेष संवाद सत्र में वैज्ञानिक करियर, अनुसंधान की चुनौतियों और भविष्य के अवसरों पर भी चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को बहुविषयक सोच विकसित करने, नवाचार को अपनाने और धैर्य के साथ अनुसंधान कार्य करने की सलाह दी।
वहीं, गोल्डन जुबली लेक्चर थिएटर में आयोजित सत्र में डॉ. शर्मिला मांडे ने नवप्रवेशित स्नातकोत्तर छात्रों को “थिंक बियॉन्ड योर डिसिप्लिन: इम्पोर्टेंस ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च टू सॉल्व रियल-वर्ल्ड प्रॉब्लम्स” विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और सामाजिक समानता जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान किसी एक विषय से संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच समन्वय और अंतरविषयक शोध की आवश्यकता है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचार और शोध आधारित सोच विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों से अपनी पारंपरिक विषय सीमाओं से बाहर निकलकर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान दोनों वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को जिम्मेदार, जिज्ञासु और नवाचारी बनने का संदेश दिया। ओरिएंटेशन कार्यक्रम के इन प्रेरक सत्रों ने नवप्रवेशित यूजी, पीजी और पीएचडी छात्रों को विज्ञान, अनुसंधान और समाज के प्रति अपनी भूमिका को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए प्रेरित किया।
















