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बारिश की हर बूंद बचाने का संदेश: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने चलाया जल संरक्षण जागरूकता अभियान

JP Bharat Shareधनबाद/बोकारो: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम) धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग स्थित ईआईएसीपी प्रोग्राम सेंटर (आरपी) ने मंगलवार को बोकारो जिले के पिंडराजोरा में #CatchTheRain – Where it Falls, When it Falls अभियान के तहत जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार…

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धनबाद/बोकारो: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम) धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग स्थित ईआईएसीपी प्रोग्राम सेंटर (आरपी) ने मंगलवार को बोकारो जिले के पिंडराजोरा में #CatchTheRain – Where it Falls, When it Falls अभियान के तहत जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में झारखंड फाउंडेशन केंद्र (एनजीओ) के सहयोग से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिला सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

झारखंड फाउंडेशन केंद्र के कार्यकारी निदेशक डॉ. जयदेव महतो ने कहा कि जल सुरक्षा और लैंगिक समानता का गहरा संबंध है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की भूमिका घरों में पानी के समुचित उपयोग से लेकर सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण तक बेहद महत्वपूर्ण है। यदि महिलाओं को जल संरक्षण की बेहतर जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे परिवार और समाज दोनों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

ईआईएसीपी प्रोग्राम सेंटर (आरपी), आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रोग्राम ऑफिसर बिश्वजीत दास ने कहा कि मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment) के “सेव वाटर” अभियान के तहत वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसे सरल एवं कम लागत वाले उपायों को अपनाकर भविष्य के जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और समुदाय में इन उपायों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आज बचाई गई बारिश की हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल भविष्य की नींव है।

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जल संसाधनों के संरक्षण और भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी सबसे अधिक आवश्यक है।


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