बलियापुर (धनबाद): कहते हैं कि माता-पिता का साया बच्चों के लिए सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड अंतर्गत मुकुंदा पंचायत के तिलाटांड़ गांव की तीन मासूम बहनों की जिंदगी में ऐसा दुख आया है, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया। पहले करीब तीन वर्ष पूर्व पिता स्वर्गीय इंद्रजीत मोदक का निधन हो गया और अब महज छह दिन पहले लंबी बीमारी के बाद मां गीता देवी भी इस दुनिया को अलविदा कह गईं। माता-पिता के निधन के बाद तीनों बहनें पूरी तरह अनाथ हो गई हैं।
माता-पिता को खोने के बाद बच्चियों के सामने अब जीवन-यापन, पढ़ाई और भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। घर में पसरा सन्नाटा और मासूम चेहरों पर अपनों को खोने का दर्द हर किसी की आंखें नम कर रहा है। गांव के लोग भी बच्चियों की स्थिति देखकर गहरी संवेदना जता रहे हैं।
इस मार्मिक घटना की जानकारी मिलने पर भाजपा नेत्री तारा देवी तिलाटांड़ गांव पहुंचीं। उन्होंने तीनों बहनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया, आर्थिक सहयोग प्रदान किया और भरोसा दिलाया कि उनकी शिक्षा, पालन-पोषण और बेहतर भविष्य के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
तारा देवी ने कहा कि किसी भी बच्चे का भविष्य अभाव और बेबसी की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। उन्होंने समाज के सक्षम और संवेदनशील लोगों से आगे आकर इन बच्चियों की मदद करने की अपील की, ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
ग्रामीणों ने भी प्रशासन और सामाजिक संगठनों से अपील की कि इन अनाथ बच्चियों के पालन-पोषण, शिक्षा और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि समय पर मिला सहयोग इन बच्चियों के जीवन में नई उम्मीद और नया संबल बन सकता है।
आज इन तीनों बहनों को सिर्फ आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि समाज के अपनापन, संवेदना और सहयोग की भी सबसे अधिक जरूरत है। यदि समाज और प्रशासन मिलकर आगे आएं, तो इन मासूम बच्चियों का भविष्य सुरक्षित और बेहतर बनाया जा सकता है।
















