रांची: MMDR संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड में राजनीतिक विरोध तेज होने लगा है। भाकपा माले, सीपीएम और सीपीआई समेत वामपंथी दलों ने विधेयक के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। रांची स्थित वाम दलों के कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में नेताओं ने केंद्र सरकार पर राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि झारखंड पहले से आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में MMDR संशोधन विधेयक के जरिए खनन क्षेत्र से जुड़े राजस्व पर राज्यों के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इसका सीधा असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भूमि और उससे संबंधित कराधान का विषय राज्यों के अधिकारों से जुड़ा है। यदि राज्यों के राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत प्रभावित होते हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर भी असर पड़ सकता है। वाम दलों ने विशेष रूप से आदिवासी, दलित और कमजोर वर्गों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
25 से 31 अगस्त तक विरोध प्रदर्शन
सीपीएम के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि छह वामपंथी दलों की बैठक में विधेयक के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत 25 से 31 अगस्त तक झारखंड के विभिन्न हिस्सों में MMDR संशोधन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है।
वाम दलों की ओर से गांवों और शहरों में जनसभाएं आयोजित करने की भी बात कही गई है। इन सभाओं के माध्यम से लोगों को विधेयक के संभावित प्रभावों की जानकारी देने और आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप
सीपीआई नेता अशोक यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों के अधिकारों को सीमित करने की दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि MMDR संशोधन विधेयक को भी इसी व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वाम नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि संशोधन से बड़े उद्योग समूहों और खनन क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को फायदा पहुंच सकता है, जबकि खनिज संपदा वाले राज्यों के राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
आंदोलन में अन्य संगठनों को जोड़ने की तैयारी
वाम दलों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। इसके लिए किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों, जन संगठनों तथा अन्य लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों को भी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
वाम नेताओं ने झारखंड सरकार और अन्य राजनीतिक दलों से राज्य के हित में इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है। अब 25 अगस्त से शुरू होने वाले विरोध कार्यक्रमों के जरिए MMDR संशोधन विधेयक के खिलाफ राज्य में राजनीतिक और जन आंदोलन तेज होने की संभावना है।
















