कतरासगढ़/धनबाद: कतरास कॉलेज, कतरासगढ़ में स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों में घटाई गई सीटों को लेकर विरोध तेज होता दिख रहा है। सत्र 2021-24 के अनुरूप सीटों को पूर्ववत करने की मांग को लेकर BBMKU बाघमारा विधायक प्रतिनिधि चित्तरंजन कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष दोबारा मामला उठाया है।
इसी सिलसिले में उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU) के कुलपति डॉ. राम कुमार सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) डॉ. पुष्पा कुमारी और कुलसचिव डॉ. राधानाथ त्रिपाठी को आवेदन सौंपा। आवेदन में कतरास कॉलेज में इतिहास, भूगोल, गणित समेत विभिन्न स्नातक विषयों की घटाई गई सीटों को सत्र 2021-24 के अनुसार फिर से बहाल करने की मांग की गई है।
सीटें घटने से विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी
चित्तरंजन कुमार सिंह के अनुसार, कतरासगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए कतरास कॉलेज पर निर्भर हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण विषयों में सीटों की संख्या कम होने से स्थानीय छात्र-छात्राओं के सामने उच्च शिक्षा प्राप्त करने को लेकर परेशानी उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ विषयों में सीटों की संख्या पूर्व निर्धारित क्षमता की तुलना में काफी कम कर दी गई है। इससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को दाखिले के लिए दूसरे कॉलेजों का रुख करना पड़ सकता है।
पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन को दिया गया था आवेदन
विधायक प्रतिनिधि ने बताया कि सीटों को पूर्ववत करने की मांग को लेकर इससे पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन को आवेदन दिया जा चुका है। इसके अलावा बाघमारा विधायक श्री शत्रुध्न महतो ने भी विद्यार्थियों और क्षेत्र के लोगों की समस्या को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखा था।
उनका कहना है कि इसके बावजूद अब तक सीटों की बहाली को लेकर कोई संतोषजनक निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से विद्यार्थियों के हित में तत्काल सकारात्मक पहल करने की मांग की है।
दो सप्ताह का अल्टीमेटम, 8 सितंबर को तालाबंदी की चेतावनी
आवेदन के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन को दो सप्ताह का समय दिया गया है। चित्तरंजन कुमार सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर घटाई गई सीटों को पूर्ववत करने अथवा सीटों में बढ़ोतरी को लेकर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो 8 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय में तालाबंदी और लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल सीटों का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को क्षेत्र की शैक्षणिक जरूरतों और विद्यार्थियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सीटों को पूर्ववत करने के साथ भविष्य में सीट बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए।
अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।
















