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धनबाद:सिंबायोसिस किड्स स्कूल में संस्कृत दिवस और रक्षाबंधन उत्सव, पूर्व सैनिकों को बांधी राखी

JP Bharat Shareधनबाद। बरवाअड्डा स्थित सिंबायोसिस किड्स स्कूल में बुधवार को संस्कृत दिवस एवं रक्षाबंधन उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक आशीष कुमार मंडल, प्राचार्या और अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की। इसके बाद बच्चों ने स्वागतम नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक…

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धनबाद। बरवाअड्डा स्थित सिंबायोसिस किड्स स्कूल में बुधवार को संस्कृत दिवस एवं रक्षाबंधन उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक आशीष कुमार मंडल, प्राचार्या और अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की। इसके बाद बच्चों ने स्वागतम नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा संस्थान, धनबाद के वरिष्ठ संरक्षक राम नाथ मिश्रा, संरक्षक राज किशोर सिंह, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह, वरिष्ठ सदस्य अवधेश कुमार द्विवेदी और अनिल कुमार मौजूद रहे। वहीं, ‘लेंस उत्सव-2026’ राज्यस्तरीय फोटो प्रतियोगिता में धनबाद का नाम रोशन करने वाले वरिष्ठ फोटोजर्नलिस्ट चंदन पॉल और फोटोजर्नलिस्ट सुभाजित घोषाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए। विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों को अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

संस्कृत प्रस्तुतियों से बच्चों ने मोहा मन

उत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने संस्कृत कविताओं, क्षमा मंत्र और श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का सुंदर पाठ प्रस्तुत किया। यूकेजी के बच्चों ने ‘रक्षा का सूत्र—देश के वीर’ नामक नाटक के माध्यम से सैनिकों को राष्ट्र का रक्षक बताते हुए उनके योगदान का संदेश दिया।

कार्यक्रम का भावुक पल तब आया, जब विद्यालय के बच्चों ने पूर्व सैनिकों की कलाई पर राखी बांधकर उनके राष्ट्रसेवा और त्याग के प्रति सम्मान व्यक्त किया। पूर्व सैनिकों ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और देशप्रेम का संदेश दिया।

संस्था के वरिष्ठ संरक्षक राम नाथ मिश्रा ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से संस्कृत में गीता पाठ की प्रशंसा करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ बच्चों को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का विद्यालय का प्रयास सराहनीय है।

प्राचार्या ने कहा कि रक्षा का अर्थ केवल राखी के धागे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प भी है। उन्होंने संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए विद्यार्थियों को संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की छात्राओं रूही कुमारी और पीहू कुमारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संतोष सर ने किया।

पूरे आयोजन के माध्यम से ‘संस्कृत से संस्कार, राखी से रिश्तों का सम्मान, सैनिकों से राष्ट्रसेवा और कला से नई दृष्टि’ का संदेश दिया गया।


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