रामगढ़ : तपती धूप में नंगे पांव साड़ी पहनकर दौड़ती कविता महतो की तस्वीरें इन दिनों उनके संघर्ष और मजबूत हौसले की कहानी बयां कर रही हैं। आर्थिक परेशानियों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच कविता ने होमगार्ड में चयन का सपना देखा है और उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।
कविता के पति दीपक महतो गुजरात में काम करते थे। बीमारी के दौरान उनके इलाज में काफी खर्च हुआ, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। पति की मौत के करीब छह महीने बाद कविता के भसुर का भी बीमारी के कारण निधन हो गया। पति के इलाज के लिए लिया गया कर्ज आज भी परिवार पर है।
कविता के दो छोटे बच्चे हैं। परिवार में सास-ससुर की जिम्मेदारी भी है। घर का खर्च चलाने के लिए वह ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं। मजदूरी और घरेलू जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा है।
कविता रोज सुबह करीब चार बजे उठकर दौड़ की तैयारी करती हैं। इसके बाद घर का काम पूरा करने के बाद मजदूरी के लिए निकल जाती हैं। तपती धूप में नंगे पांव दौड़कर शारीरिक परीक्षा की तैयारी करना उनके संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
कविता महतो की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका प्रयास जारी है। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी मेहनत रंग लाएगी और होमगार्ड में चयन का सपना पूरा होगा।
















