धनबाद : झरिया के अग्नि प्रभावित क्षेत्रों से विस्थापित होकर बेलगड़िया में बसे हजारों परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा आज भी एक बड़ा सवाल बनी हुई है। एक तरफ 1 मार्च 2021 को तत्कालीन धनबाद उपायुक्त उमाशंकर सिंह ने बेलगड़िया विहार कॉलोनी के फेज-1 में अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन किया था, वहीं दूसरी तरफ फेज-3 में 20 बेड का स्थायी उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने और 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी। लेकिन सवाल यह है कि जिस स्थायी स्वास्थ्य केंद्र से लोगों को बेहतर इलाज की उम्मीद थी, वह आज तक चालू क्यों नहीं हुआ?
2021 में घोषणा, 24 घंटे इलाज का था वादा
एक मार्च 2021 को तत्कालीन उपायुक्त उमाशंकर सिंह ने बेलगड़िया में अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा था कि स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अस्थायी केंद्र में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ओपीडी सेवा उपलब्ध कराने की योजना थी। साथ ही, फेज-3 में स्थायी स्वास्थ्य केंद्र विकसित करने की बात कही गई थी, जहां 24 घंटे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती का लक्ष्य रखा गया था। इसकी जानकारी उस समय प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में भी दी गई थी।
फेज-3 का अस्पताल बना, लेकिन मरीजों को नहीं मिला लाभ!
स्थानीय लोगों के अनुसार, फेज-3 में 20 बेड वाले उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन बनाया गया था, लेकिन यह आज तक नियमित रूप से चालू नहीं हो सका। आरोप है कि देखरेख के अभाव में भवन धीरे-धीरे जर्जर होता चला गया। वर्तमान स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि भवन के दरवाजे और खिड़कियां तक गायब हैं। यदि यह जानकारी सही है, तो यह केवल एक भवन की बदहाली नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों को मिलने वाली बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा पर भी गंभीर सवाल है।
आखिर भवन बनने के बाद इसे स्वास्थ्य विभाग को कब सौंपा गया? यदि भवन तैयार था, तो डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती क्यों नहीं हुई? इसकी सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी किस विभाग के पास थी? और यदि सामान की चोरी हुई, तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दी गई या नहीं? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
1 सितंबर 2026 को फिर हुआ उद्घाटन, नाम पड़ा आयुष्मान आरोग्य मंदिर
एक सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर के बेलगड़िया दौरे के दौरान आयुष्मान आरोग्य मंदिर का उद्घाटन किया गया। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, यह फेज-1 में पहले से संचालित अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र का रिनोवेशन किया हुआ केंद्र है। यानी 2021 में जिस अस्थायी केंद्र का उद्घाटन हुआ था, उसी को नए स्वरूप और नए नाम के साथ दोबारा प्रस्तुत किया गया।
ऐसे में सवाल यह है कि जब फेज-3 में स्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाने की घोषणा हुई थी, तो उस परियोजना का क्या हुआ? क्या पुराने भवन को चालू करने की कोशिश की गई? यदि नहीं, तो अस्थायी केंद्र के रिनोवेशन और नए नामकरण के साथ उद्घाटन से लोगों की 24 घंटे इलाज की मूल जरूरत कैसे पूरी होगी?
#अब_जिम्मेदारी तय करने का #समय
बेलगड़िया के विस्थापित परिवारों को उद्घाटन समारोहों से अधिक जरूरी नियमित इलाज, डॉक्टर, नर्स, दवाइयां और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा चाहिए। यदि सरकारी राशि से भवन का निर्माण कराया गया था और वर्षों तक उसका उपयोग नहीं हुआ, तो निर्माण की गुणवत्ता, खर्च, हस्तांतरण, सुरक्षा और संचालन में हुई देरी की जांच होनी चाहिए।
JRDA, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि फेज-3 का 20 बेड वाला स्वास्थ्य केंद्र किस योजना के तहत बनाया गया, उसकी वर्तमान विभागीय स्थिति क्या है और उसे चालू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। भवन से दरवाजे-खिड़कियां गायब होने की शिकायत की जांच कर चोरी या लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या बेलगड़िया के लोगों को केवल उद्घाटन और घोषणाएं ही मिलेंगी, या कभी 24 घंटे इलाज की सुविधा भी मिलेगी?
जिस स्वास्थ्य केंद्र को विस्थापित परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनना था, वह यदि आज भी बंद और बदहाल है, तो इसकी जवाबदेही तय करना जरूरी है। आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है—निर्माण एजेंसी, भवन का रखरखाव करने वाला विभाग, स्वास्थ्य विभाग या परियोजना की निगरानी करने वाले अधिकारी? इसका जवाब दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के आधार पर सामने आना चाहिए।
















