मनईटांड़ बस्ती में बुधवार को चड़क पूजा और भोक्ता पूजा का भव्य आयोजन श्रद्धा और परंपरा के माहौल में संपन्न हुआ। पूरे इलाके में “हर-हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
पाटोनी की पूजा के बाद शुरू होता है अनुष्ठान
करीब डेढ़ सौ साल पुरानी इस परंपरा में खास बात यह है कि शिवभक्तों के भोक्ता खूंटा में प्रवेश करने से पहले पाटोनी (पुजारी) द्वारा विधि-विधान से पूजा पूरी की जाती है। इस वर्ष यह अनुष्ठान शंकर महतो के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
तीन दिन के उपवास के बाद पूजा
तीन दिनों तक कठिन व्रत रखने के बाद 350 से अधिक श्रद्धालुओं ने सफेद वस्त्र पहनकर भगवान शिव की आराधना की और परिवार की खुशहाली की कामना की। पूजा स्थल को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था।
कठिन साधना से दिखाई आस्था
इस दौरान शिवभक्तों ने शरीर में कील चुभोकर, भोक्ता खूंटा में घूमकर और रस्सियों से गाड़ी खींचकर अपनी गहरी श्रद्धा का प्रदर्शन किया। कुछ भक्तों ने सीने में कील धारण कर पूजा स्थल की परिक्रमा भी की।
महिलाओं की भी रही सक्रिय भागीदारी
पूरे अनुष्ठान में महिलाओं ने भी व्रत रखकर कलश के साथ पूजा में हिस्सा लिया। पूजा समाप्त होने के बाद ही सभी श्रद्धालुओं ने उपवास तोड़ा।
प्रसाद वितरण और परंपरा की कहानी
समिति के सदस्यों ने बताया कि इस पूजा की शुरुआत गांव के कुछ लोगों ने की थी, जो आज एक बड़े धार्मिक आयोजन का रूप ले चुकी है। श्रद्धालुओं के बीच चना, गुड़, हलवा और शरबत का प्रसाद वितरित किया गया।
निष्कर्ष
यह आयोजन न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि आज भी गांवों में सदियों पुरानी परंपराएं पूरे श्रद्धा भाव के साथ जीवित हैं।
Follow the JP BHARAT LIVE channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb7gTYlLtOj4hdQofo0E
















