धनबाद समेत देशभर की कोयला खदानों में बढ़ती गर्मी को देखते हुए खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 22 अप्रैल 2026 को जारी गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि हीट स्ट्रेस के कारण मजदूरों की सेहत और जान दोनों पर खतरा बढ़ गया है, इसलिए सभी खदान प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से जरूरी कदम उठाने होंगे।
डीजीएमएस के अनुसार, खदानों में काम करने वाले मजदूरों को हर 15 से 20 मिनट के अंतराल पर पानी पीना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए 10 से 15 डिग्री तापमान वाला ठंडा और हल्का नमकीन पानी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। साथ ही कार्यस्थल के पास कूल रेस्ट शेड बनाने और मजदूरों को बारी-बारी से आराम देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि नए या लंबे समय बाद काम पर लौटे मजदूरों को धीरे-धीरे काम की आदत डाली जाए। पहले दो दिन 20 से 30 प्रतिशत काम, फिर क्रमशः बढ़ाते हुए सातवें दिन पूर्ण कार्यभार दिया जाए। अत्यधिक गर्मी की स्थिति में यह अवधि 10 से 14 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।
डीजीएमएस ने शिफ्ट से पहले मजदूरों को शराब से परहेज, पर्याप्त नींद और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी है। साथ ही हीट स्ट्रेस के लक्षण—जैसे चक्कर आना, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित न कर पाना—की पहचान कर तुरंत प्राथमिक उपचार देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, खदानों में गर्म चट्टानें, मशीनें और ज्यादा नमी के कारण जोखिम और बढ़ जाता है। ऐसे में बुजुर्ग, बीपी-शुगर के मरीज और पहले हीट स्ट्रोक झेल चुके मजदूरों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
डीजीएमएस ने साफ चेतावनी दी है कि इन निर्देशों का पालन नहीं करने पर खान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। “लेट्स स्टे कूल, स्टे सेफ” के संदेश के साथ सुरक्षित खनन पर जोर दिया गया है।
गर्मी से जंग में सुरक्षा ही सबसे बड़ा हथियार, मजदूरों की सेहत पर अब सख्त नजर।
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