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गोविंदपुर की शकुंतला मिश्रा ने किया देहदान का संकल्प, मृत्यु के बाद अंगों से मिलेगा जीवनदान

JP Bharat Shareगोविंदपुर (धनबाद): मानवता और समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए गोविंदपुर क्षेत्र के स्मार्ट सिटी कर्माटांड़ कॉलोनी निवासी शकुंतला मिश्रा ने अपनी मृत्यु के बाद देहदान करने का संकल्प लिया है। उनके इस फैसले की क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है और लोग इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम…

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गोविंदपुर (धनबाद): मानवता और समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए गोविंदपुर क्षेत्र के स्मार्ट सिटी कर्माटांड़ कॉलोनी निवासी शकुंतला मिश्रा ने अपनी मृत्यु के बाद देहदान करने का संकल्प लिया है। उनके इस फैसले की क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है और लोग इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बता रहे हैं।

शकुंतला मिश्रा ने घोषणा की है कि उनके निधन के बाद उनके शरीर के उपयोगी अंग जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी को नया जीवन मिल सके। वहीं शेष शरीर को मेडिकल शिक्षा और शोध कार्य के लिए शहीद निर्मल महतो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल को सौंप दिया जाए।

अपने निर्णय के बारे में बात करते हुए शकुंतला मिश्रा ने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं के लिए जीना नहीं, बल्कि दूसरों के काम आना भी है। उन्होंने कहा कि यदि उनके शरीर का कोई अंग किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचा सके तो इससे बड़ी संतुष्टि उनके लिए कोई नहीं होगी। साथ ही उनका शरीर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण में भी सहायक बन सकेगा।

उन्होंने बताया कि समाज में अंगदान और देहदान को लेकर अभी भी जागरूकता की कमी है। ऐसे में लोगों को इस दिशा में आगे आने की आवश्यकता है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर अंग उपलब्ध हो सकें और मेडिकल शिक्षा को भी मजबूती मिले।

आमतौर पर लोग मृत्यु के बाद पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को ही अंतिम विकल्प मानते हैं, लेकिन शकुंतला मिश्रा ने अपनी सोच और निर्णय से समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। उनके इस मानवीय कदम की गोविंदपुर सहित पूरे धनबाद जिले में सराहना हो रही है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसे मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान और देहदान जैसे निर्णय कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकते हैं। ऐसे में शकुंतला मिश्रा का यह संकल्प न केवल जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदान का माध्यम बन सकता है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।


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