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79 साल बाद भी सड़क का इंतजार, चंदनदीह के ग्रामीणों की जिंदगी बनी संघर्ष की कहानी

JP Bharat Shareबोकारो/चंदनकियारी: विकास और आधुनिकता के दावों के बीच बोकारो जिले के Chandankiyari प्रखंड का चंदनदीह टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। दामुडीह पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गांव तक पहुंचने के लिए अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है, जिससे ग्रामीणों को रोजाना भारी कठिनाइयों का…

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बोकारो/चंदनकियारी: विकास और आधुनिकता के दावों के बीच बोकारो जिले के Chandankiyari प्रखंड का चंदनदीह टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। दामुडीह पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गांव तक पहुंचने के लिए अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है, जिससे ग्रामीणों को रोजाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क नहीं होने के कारण बीमार मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे लोगों की जान पर बन आती है।

सड़क की कमी का असर गांव के सामाजिक जीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उचित आवागमन व्यवस्था नहीं होने के कारण बाहरी परिवार अपनी बेटियों की शादी गांव में करने से हिचकते हैं। इसके चलते कई युवाओं के रिश्ते टूट चुके हैं और कई युवक अब भी विवाह की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क नहीं होने की वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ भी समय पर नहीं मिल पाता। कई जरूरतमंद परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन जैसी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का गांव तक पहुंचना भी मुश्किल होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष Amar Kumar Bauri समेत कई जनप्रतिनिधियों को आवेदन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

गांव के लोगों का कहना है कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी यदि एक गांव सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है, तो यह विकास के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण कर गांव को मुख्यधारा से जोड़ने की मांग की है।


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