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आईआईटी (आईएसएम) की पहल: बांकुड़ा में जनजातीय महिलाओं को मिलेट खेती और उद्यमिता से जोड़ा जाएगा

JP Bharat Shareधनबाद: Indian Institute of Technology (ISM) Dhanbad ने जनजातीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उच्च गुणवत्ता वाले मिलेट उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक विशेष सामुदायिक क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल Coal India Limited की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के…

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धनबाद: Indian Institute of Technology (ISM) Dhanbad ने जनजातीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उच्च गुणवत्ता वाले मिलेट उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक विशेष सामुदायिक क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल Coal India Limited की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के तहत संचालित की जा रही है।

यह कार्यक्रम “उच्च गुणवत्ता वाले मिलेट उत्पादन के माध्यम से पश्चिम बंगाल की जनजातीय महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने तथा डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने” परियोजना का हिस्सा है। परियोजना पिछले वर्ष से संचालित है और इसके अंतर्गत पहले भी कई प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

कार्यक्रम के तहत आईआईटी (आईएसएम) की टीम पश्चिम बंगाल के Bankura जिले के सालतोड़ा प्रखंड स्थित रंगामाटिया गांव में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ संवाद कर रही है। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूदा कृषि पद्धतियों, चुनौतियों और मिलेट आधारित आजीविका की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।

परियोजना के अंतर्गत गांव स्तर पर सर्वेक्षण कर फसल पैटर्न, उपलब्ध संसाधनों तथा बाजार संबंधी चुनौतियों का आकलन भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों और विशेष रूप से महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों, मूल्य संवर्धन और विपणन से जोड़ना है।

परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं प्रबंधन अध्ययन एवं औद्योगिक अभियंत्रण विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर Niladri Das ने कहा कि मिलेट खेती ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

वहीं सह-प्रधान अन्वेषक एवं विभाग की सहायक प्रोफेसर Rashmi Singh ने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को आधुनिक खेती, मूल्य संवर्धन, डिजिटल मार्केटिंग और बाजार से जुड़ाव की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में विकसित हो सकें।

यह पहल महिला सशक्तीकरण, सतत ग्रामीण विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


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