धनबाद: वैज्ञानिक पद्धति से मिलेट यानी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित करने के उद्देश्य से आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की ओर से पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया गया है। कार्यक्रम 7 से 9 सितंबर 2026 तक सालतोड़ा प्रखंड की सालमा ग्राम पंचायत में आयोजित किया जा रहा है।
यह पहल कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के सहयोग से संचालित कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) परियोजना का हिस्सा है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और ग्रामीण समुदाय को आधुनिक मिलेट खेती की जानकारी देने के साथ महिलाओं के लिए इससे जुड़े उद्यम और रोजगार के अवसर तैयार करना है।
👩🌾 किसानों और महिला समूहों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
यह कार्यक्रम पिछले वर्ष से संचालित परियोजना की अगली कड़ी है। इसके तहत पहले भी जनजातीय महिलाओं, किसानों और स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों को मिलेट की खेती, व्यवसाय विकास, वित्तीय सहायता, वैल्यू एडिशन और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
वर्तमान तीन दिवसीय कार्यक्रम में स्थानीय किसानों, स्वयं सहायता समूहों और महिला मंडल के सदस्यों को मिलेट उत्पादन की आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण में बीज उपचार, लाइन में बुवाई, फसल प्रबंधन और नमी संरक्षण जैसी तकनीकों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रतिभागियों को डेमोंस्ट्रेशन प्लॉट का भ्रमण भी कराया जा रहा है, ताकि वे खेती की तकनीकों को मौके पर समझ सकें।
📦 खेती से बाजार तक की जानकारी
कार्यक्रम में सिर्फ उत्पादन तक सीमित जानकारी नहीं दी जा रही, बल्कि मिलेट को बाजार तक पहुंचाने से जुड़े पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें वैल्यू एडिशन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और मार्केट लिंकिंग जैसे विषय शामिल हैं।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक प्रो. निलाद्रि दास ने कहा कि वैज्ञानिक मिलेट खेती को टिकाऊ आजीविका और ग्रामीण उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है।
वहीं, सह-प्रधान अन्वेषक प्रो. रश्मि सिंह ने कहा कि महिला समूहों को मजबूत करने और उन्हें बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मिलेट खेती जनजातीय महिलाओं के लिए टिकाऊ आय का माध्यम बन सके।
कार्यक्रम का संचालन आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रबंधन अध्ययन एवं औद्योगिक अभियंत्रण विभाग की ओर से किया जा रहा है।
















