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आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता ने जापान में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया चंद्रमा पर शोध

JP Bharat Shareधनबाद, 7 अगस्त: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के एप्लाइड जियोफिजिक्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता ने जापान के फुकुओका में आयोजित प्रतिष्ठित एशिया ओशिनिया जियोसाइंसेज सोसायटी (AOGS)-2026 सम्मेलन में चंद्रमा की सतह के नीचे की संरचना पर आधारित अपना शोध प्रस्तुत किया। सम्मेलन में उन्होंने तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करने के…

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धनबाद, 7 अगस्त: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के एप्लाइड जियोफिजिक्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता ने जापान के फुकुओका में आयोजित प्रतिष्ठित एशिया ओशिनिया जियोसाइंसेज सोसायटी (AOGS)-2026 सम्मेलन में चंद्रमा की सतह के नीचे की संरचना पर आधारित अपना शोध प्रस्तुत किया। सम्मेलन में उन्होंने तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करने के साथ-साथ एक अन्य सत्र में सह-अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई।

प्रो. गुप्ता ने “Capture the Geomechanical Property in the Shallow Subsurface of the Moon Based on Waveform Analysis” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। यह अध्ययन फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ चल रही संयुक्त शोध परियोजना का हिस्सा है। शोध में वेवफॉर्म विश्लेषण के माध्यम से चंद्रमा की सतह के नीचे मौजूद जियोमैकेनिकल विशेषताओं का अध्ययन किया गया है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सम्मेलन के दौरान प्रो. गुप्ता ने “Surface Science and Exploration of the Moon and Airless Planetary Bodies Including Volatiles, ISRU and Habitat” विषयक तकनीकी सत्र में सह-अध्यक्ष के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। इस सत्र में दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने ग्रह विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े नवीनतम शोध साझा किए।

एओजीएस पृथ्वी एवं अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित वैश्विक मंच है, जहां अमेरिका, यूरोप और एशिया सहित विभिन्न देशों के प्रमुख वैज्ञानिक और शोधकर्ता अपने अनुसंधान प्रस्तुत करते हैं। सम्मेलन में प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता की सक्रिय भागीदारी न केवल आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की वैश्विक शोध जगत में बढ़ती पहचान को दर्शाती है, बल्कि ग्रह विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान के बढ़ते योगदान को भी रेखांकित करती है।


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