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बाबा बैद्यनाथ मंदिर के 18 दानपात्रों से निकले 22.88 लाख रुपये, नेपाली और भूटानी मुद्रा भी मिली

JP Bharat Shareदेवघर: विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर परिसर में स्थापित सभी 18 दानपात्रों को खोला गया। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की निगरानी में पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पारदर्शी ढंग से संपन्न हुई। दानपात्रों से प्राप्त नकद राशि और अन्य मुद्राओं को सुरक्षित…

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देवघर: विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर परिसर में स्थापित सभी 18 दानपात्रों को खोला गया। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की निगरानी में पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पारदर्शी ढंग से संपन्न हुई। दानपात्रों से प्राप्त नकद राशि और अन्य मुद्राओं को सुरक्षित रूप से मंदिर प्रशासनिक भवन पहुंचाकर उनकी गिनती की गई।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया ने बताया कि दानपात्रों की गणना के दौरान कुल 22 लाख 88 हजार 605 रुपये नकद प्राप्त हुए। इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित 11,610 रुपये की नेपाली मुद्रा तथा 66 रुपये की भूटानी मुद्रा भी दानपात्रों से मिली। इससे स्पष्ट होता है कि बाबा बैद्यनाथ धाम में देश के साथ-साथ नेपाल और भूटान सहित पड़ोसी देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

दानपात्र खोलने और राशि की गिनती के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सीसीटीवी निगरानी और निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी की गई, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे। गिनती पूरी होने तक सभी राशि को मंदिर प्रशासनिक भवन में सुरक्षित रखा गया।

श्रावणी मेला सहित वर्षभर बाबा बैद्यनाथ धाम में लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलार्पण के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा और आस्था के साथ अर्पित की गई दानराशि मंदिर के रखरखाव, विकास कार्यों, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मंदिर प्रशासन समय-समय पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दानपात्रों को खोलकर उनकी गणना कराता है।

मंदिर प्रशासन ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए दानराशि का उपयोग विभिन्न विकास कार्यों में किया जाता है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मंदिर परिसर में निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूजा-अर्चना करें।


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