भागलपुर : श्रावणी मेला शुरू होने से पहले डाक कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था और संकल्प का एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। असरगंज-कच्ची कांवड़िया पथ पर एक पूर्व सैनिक अपने पूरे शरीर को लोहे की जंजीरों से जकड़कर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की यात्रा करते नजर आए। उनकी इस अनूठी साधना ने श्रद्धालुओं और राहगीरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
शेखपुरा जिले के एकड़ा गांव निवासी पूर्व सैनिक राम उदय सिंह सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुए हैं। उन्होंने बताया कि वे भारतीय सेना में 18 वर्षों तक सेवा दे चुके हैं और सेवानिवृत्ति के बाद नियमित रूप से बाबा धाम की यात्रा करते आ रहे हैं।
राम उदय सिंह ने कहा कि इस वर्ष उन्होंने जनकल्याण, सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना को लेकर स्वयं को जंजीरों से बांधकर डाक कांवड़ यात्रा करने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि यह यात्रा केवल व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण के लिए की जा रही एक विशेष साधना है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले वे सुराही कांवड़ के साथ बाबा धाम की यात्रा करते थे, लेकिन इस बार उन्होंने कुछ अलग और कठिन संकल्प लेकर यात्रा शुरू की है। रास्ते में उनकी इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं। लोग उनकी भक्ति, अनुशासन और समर्पण की सराहना कर रहे हैं।
कांवड़िया पथ पर जहां-जहां से राम उदय सिंह गुजर रहे हैं, वहां श्रद्धालुओं की भीड़ उन्हें देखने के लिए रुक रही है। उनकी जंजीरों में बंधी यह यात्रा इन दिनों पूरे मार्ग में चर्चा का विषय बनी हुई है। कई श्रद्धालु इसे अटूट आस्था, दृढ़ संकल्प और जनकल्याण की भावना का प्रतीक बता रहे हैं।
श्रावणी यात्रा के प्रारंभिक दौर में ही सामने आया यह अनूठा दृश्य श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और बाबा भोलेनाथ के प्रति भक्तों की अगाध श्रद्धा को दर्शा रहा है।
















