धनबाद : पूर्वी भारत के कई हिस्सों में मनाया जाने वाला विपद तारिणी पूजा इस वर्ष विशेष धार्मिक संयोगों के साथ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में मनाया जाएगा। यह पूजा मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां विपद तारिणी की आराधना जीवन के संकटों से रक्षा, परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना के लिए की जाती है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार और शनिवार को यह पूजा की जाती है। इस वर्ष पहला प्रमुख पूजन 18 जुलाई तथा दूसरा 21 जुलाई को किया जाएगा। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में व्रत रखकर विधि-विधान से मां की आराधना करेंगे।
पूजा में अनानास का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि मां को अनानास अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। इसके अलावा पूजा में 13 प्रकार के फल, 13 प्रकार के फूल और 13 गांठों वाला लाल रक्षासूत्र अर्पित करने की भी परंपरा है, जिसे शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण कर मां विपद तारिणी की पूजा करती हैं। धूप, दीप, अक्षत, चुनरी, नारियल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने के बाद व्रत कथा का पाठ एवं आरती की जाती है। पूजा के उपरांत विवाहित महिलाएं सौभाग्य और परिवार की रक्षा की कामना के साथ 13 गांठों वाला लाल धागा अपनी दाहिनी कलाई पर बांधती हैं और प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं।
हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं में इस पर्व को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना की तैयारियां तेज हैं और श्रद्धालु मां विपद तारिणी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं।
















