धनबाद | शिक्षा संवाददाता
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की ओर से 10वीं और 12वीं के छात्रों को अब तक अंकपत्र (मार्कशीट) जारी नहीं किए जाने के कारण धनबाद जिले के हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। मार्कशीट के अभाव में 11वीं और स्नातक में नामांकन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे छात्र और अभिभावक दोनों परेशान हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में 10वीं परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 25,824 छात्र 11वीं कक्षा में नामांकन नहीं ले पा रहे हैं, जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा पास कर चुके 22,433 छात्र स्नातक में प्रवेश का इंतजार कर रहे हैं। इस प्रकार कुल 48,257 छात्रों का एडमिशन फिलहाल अटका हुआ है।
बताया जा रहा है कि जैक ने 10वीं का परीक्षा परिणाम 23 अप्रैल को और 12वीं का परिणाम 7 मई को जारी किया था। परिणाम घोषित हुए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद छात्रों को अंकपत्र उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके कारण छात्र लगातार स्कूलों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
स्कूल प्रबंधन भी इस स्थिति से परेशान है। स्कूलों का कहना है कि अंकपत्र और स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC) के बिना नामांकन प्रक्रिया शुरू करना संभव नहीं है। जैक की ओर से मार्कशीट के साथ अन्य जरूरी दस्तावेज भी जारी किए जाते हैं, जिनकी प्रतीक्षा की जा रही है।
धनबाद जिले में कुल 37 प्लस टू विद्यालयों में इंटरमीडिएट स्तर की पढ़ाई होती है। इन विद्यालयों में विज्ञान, वाणिज्य और कला संकाय में प्रवेश दिया जाता है। हालांकि सरकारी विद्यालयों में सीटों की संख्या को लेकर कोई सख्त सीमा नहीं है, लेकिन शिक्षक अनुपात और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ही नामांकन लिया जाता है।
दूसरी ओर, स्नातक स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। बीबीएमकेयू से संबद्ध धनबाद और बोकारो के कॉलेजों में लगभग 46 हजार सीटों पर नामांकन होना है, लेकिन अब तक विश्वविद्यालय की ओर से चांसलर पोर्टल भी नहीं खोला गया है। पोर्टल शुरू नहीं होने से स्नातक नामांकन प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
गवर्नमेंट (एचई) हाई स्कूल धनबाद के प्राचार्य राजेश कुमार सिंह ने बताया कि अंकपत्र नहीं मिलने के कारण विद्यालयों में नामांकन शुरू नहीं किया जा सका है। छात्र लगातार जानकारी लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।
छात्रों और अभिभावकों ने जैक से जल्द से जल्द अंकपत्र जारी करने की मांग की है ताकि नई शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई समय पर शुरू हो सके और विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान न हो।
















