पूर्वी टुंडी (धनबाद): धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी स्थित गढ़ रघुनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से इंसानियत और संवेदनशीलता की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहां एक जख्मी और तेज बुखार से पीड़ित बंदर इंसानों की तरह ओपीडी की कतार में अपनी बारी का इंतजार करता दिखाई दिया। इस भावुक दृश्य ने अस्पताल में मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अस्पताल परिसर में दो बंदर पहुंचे थे। इनमें एक बंदर बाहर बैठकर अपने साथी की निगरानी करता रहा, जबकि दूसरा घायल बंदर बिना किसी को नुकसान पहुंचाए चुपचाप मरीजों की कतार में खड़ा होकर इलाज का इंतजार करता रहा।
ड्यूटी पर तैनात डॉ. विकास राणा की नजर जैसे ही घायल बंदर पर पड़ी, उन्होंने तुरंत उसका उपचार शुरू किया। उन्होंने बंदर की स्थिति का परीक्षण कर तेज बुखार के लिए पैरासिटामोल दी, जिसे बंदर ने शांतिपूर्वक खा लिया। इसके बाद शरीर में पानी की कमी को दूर करने के लिए डॉक्टर ने उसे ओआरएस का घोल पिलाया तथा उसके शरीर पर लगे घावों की सफाई कर दवा और मरहम लगाया।
इलाज के बाद डॉ. राणा ने बंदर के लिए ताजे केले और पीने के पानी की भी व्यवस्था की। उपचार मिलने के बाद घायल बंदर काफी सहज नजर आया और अपने साथी के साथ बिना किसी को नुकसान पहुंचाए शांतिपूर्वक जंगल की ओर लौट गया।
डॉ. विकास राणा ने कहा कि बेजुबान भी प्यार, दया और संवेदनशीलता की भाषा को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने बताया कि घायल बंदर ने इलाज के दौरान एक अनुशासित मरीज की तरह पूरा सहयोग किया।
इस अनोखी घटना को देखने वाले अस्पताल कर्मियों और स्थानीय लोगों ने इसे इंसानियत और पशु प्रेम की प्रेरणादायक मिसाल बताया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि दया और संवेदना की कोई भाषा नहीं होती और प्रेम का व्यवहार इंसान ही नहीं, बेजुबान जीव भी समझते हैं।
















