झारखंड : राज्य में खनन गतिविधियों को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संरक्षित जंगलों के पास पत्थर खनन और क्रशर संचालन के लिए न्यूनतम दूरी 250 मीटर से बढ़ाकर 500 मीटर कर दी है। अब जंगलों से 500 मीटर के बाहर ही खनन की अनुमति होगी।
यह फैसला चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि पर्यावरण संरक्षण सर्वोपरि है और इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
250 मीटर नियम क्यों हुआ रद्द?
कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) द्वारा 2015 और 2017 में जारी उन अधिसूचनाओं को खारिज कर दिया, जिनमें खनन की दूरी घटाकर 250 मीटर कर दी गई थी। अदालत ने इसे “अप्रासंगिक तथ्यों पर आधारित” बताते हुए अस्वीकार कर दिया और पहले की 500 मीटर दूरी बहाल कर दी।
1 किमी वाले आदेश पर भी स्पष्टता
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जनवरी 2026 में दिया गया 1 किलोमीटर के दायरे में खनन रोकने का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की गलत व्याख्या पर आधारित था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेशों में यह स्पष्ट किया था कि 1 किमी का ईको-सेंसिटिव जोन केवल राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों पर लागू होता है, सामान्य संरक्षित जंगलों पर नहीं।
कोर्ट के अहम तर्क
- 250 मीटर की दूरी पर्यावरण के लिहाज से पर्याप्त नहीं
- JSPCB की विशेषज्ञ समिति में पर्यावरण विशेषज्ञों की कमी
- अन्य राज्यों के नियमों को बिना स्थानीय अध्ययन के लागू किया गया
- झारखंड के जंगलों की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं किया गया
📅 अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को होगी। तब तक 500 मीटर दूरी का नियम लागू रहेगा।
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