धनबाद: लगातार गिरते जलस्तर के कारण Maithon Dam को लेकर चिंता बढ़ गई है। डैम का जलस्तर घटकर 461 फीट पर पहुंच गया है, जो सामान्य स्तर से काफी कम माना जा रहा है। जलस्तर में आई इस गिरावट के चलते डैम के भीतर डूबे रहने वाले कई टापू और विशाल चट्टानें बाहर दिखाई देने लगी हैं।
भीषण गर्मी, हाइडल पावर प्लांट से पानी छोड़े जाने तथा मानसून पूर्व मरम्मत कार्यों के कारण जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसका असर स्थानीय पर्यटन और इससे जुड़े व्यवसायों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। नौकाघाट से पानी काफी दूर खिसक जाने के कारण नाविकों, छोटे दुकानदारों और झूला संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पर्यटकों की संख्या में भी लगातार कमी देखी जा रही है।
मैथन डैम में टला बड़ा हादसा
मंगलवार को डैम में एक बड़ा हादसा टल गया। पर्यटकों से भरी एक नाव पानी के भीतर छिपे पत्थर से टकरा गई, जिससे नाव डूबने लगी। नाव में सवार करीब एक दर्जन पर्यटकों में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान स्पीड बोट चालक Tajuddin ने सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
जलस्तर घटने के कारण डैम के अंदर कई बड़े पत्थर और चट्टानें उभर आई हैं, जिससे नौकायन पहले की तुलना में अधिक जोखिमपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है।
पेयजल आपूर्ति पर मंडराया संकट
मैथन डैम का जलस्तर कम होने से मैथन-धनबाद जलापूर्ति योजना पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। चिरकुंडा, निरसा, कुमारधुबी और गोविंदपुर समेत कई क्षेत्रों में पेयजल संकट की संभावना जताई जा रही है।
इस संबंध में डीवीसी के प्रोजेक्ट हेड Subir Saha ने बताया कि यदि जलस्तर 460 फीट से नीचे चला जाता है, तो झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई शहरी तथा औद्योगिक क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और मानसून के आगमन से हालात सुधरने की उम्मीद की जा रही है।
















