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निर्विरोध चुनाव और NOTA पर उठे सवाल, सुधार की मांग तेज

JP Bharat Shareधनबाद: चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ग्रामीण एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष रंजीत सिंह उर्फ बबलू सिंह ने चुनाव प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठाई है। उन्होंने चुनाव आयोग को भेजे अपने पत्र में कहा कि देश में निष्पक्ष…

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धनबाद: चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ग्रामीण एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष रंजीत सिंह उर्फ बबलू सिंह ने चुनाव प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठाई है।

उन्होंने चुनाव आयोग को भेजे अपने पत्र में कहा कि देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना बेहद जरूरी है, लेकिन हाल के समय में चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। खासतौर पर निर्विरोध चुनाव (बिना मतदान के जीत) की बढ़ती घटनाओं को उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

उनका कहना है कि जब चुनाव में “NOTA” (None of the Above) जैसा विकल्प मौजूद है, तब मतदाताओं को मतदान का मौका दिए बिना किसी उम्मीदवार को विजयी घोषित करना उचित नहीं है। इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ मामलों में केवल एक उम्मीदवार होने पर भी मतदान नहीं कराया गया, जबकि ऐसी स्थिति में भी जनता को अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए।

ग्रामीण एकता मंच ने सुझाव दिया है कि अगर किसी क्षेत्र में केवल एक ही उम्मीदवार बचता है, तब भी मतदान अनिवार्य होना चाहिए और NOTA को विकल्प के रूप में शामिल रखा जाए। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और जनता की वास्तविक राय सामने आएगी।

संगठन ने चुनाव आयोग से इस विषय पर जरूरी नीतिगत बदलाव करने और भविष्य में मतदाताओं के अधिकारों को प्राथमिकता देने की मांग की है।


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