पूर्वी टुंडी: धनबाद जिले के पाण्डूवा गांव में सोनाराम कुंभकार पिछले छह वर्षों से मिट्टी के आकर्षक दीये, धूपदानी और कलश तैयार कर रहे हैं। दीपावली को लेकर उनके घर में इन दिनों काम जोरों पर है। रंग-बिरंगे और आधुनिक डिजाइन वाले दीयों की मांग इतनी है कि दूर-दराज के व्यापारी उन्हें खरीदने के लिए सीधे घर पहुंच रहे हैं।
सोनाराम के मुताबिक, वह अपने परिवार के साथ प्रतिदिन करीब 1,000 दीये तैयार करते हैं। दीपावली के दौरान थोक व्यापारी घर से ही तैयार सामान खरीद लेते हैं। त्योहार के बाद भी परिवार मिट्टी के बर्तन और सजावटी सामान बनाकर अपना काम जारी रखता है।
सोनाराम ने बताया कि सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद की है। आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक मशीन मिलने से उत्पादन तेज हुआ और मेहनत कम हुई। वहीं, आसान ऋण सुविधा से कच्चे माल की व्यवस्था और कारोबार के विस्तार में सहायता मिली।
सोनाराम जैसे कारीगर मिट्टी के दीयों के जरिए अपनी आजीविका चलाने के साथ पारंपरिक कला और संस्कृति को भी जीवित रख रहे हैं। पाण्डूवा गांव में तैयार ये दीये इस दीपावली कई घरों को रोशन करेंगे।
















