धनबाद: बाघमारा अंचल के कतरास क्षेत्र में यूजीसी के प्रस्तावित नए प्रावधानों को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। इसी मुद्दे पर पार्षद छोटू सिंह के नेतृत्व में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रस्तावित प्रावधानों के संभावित सामाजिक और शैक्षणिक प्रभावों पर चर्चा की गई।
बैठक में वक्ताओं ने प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी भी नए प्रावधान को लागू करने से पहले उसके विद्यार्थियों, शिक्षण संस्थानों और व्यापक समाज पर पड़ने वाले प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना होना चाहिए। बैठक में प्रस्तावित प्रावधानों के विरोध में आगे की गतिविधियां शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से चलाने पर सहमति बनी।
इस दौरान राजपूत विचार मंच के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह, केंद्रीय उपाध्यक्ष ददन सिंह और केंद्रीय उपाध्यक्ष उमेश सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। इनके अलावा विनोद सिंह, रघुनाथ दुबे, सत्येंद्र सिंह, मीनू मिश्रा, कृष्णा सिंह, शिव नारायण सिंह, उमेश तिवारी और नंद कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
राजपूत विचार मंच के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ने कहा कि यूजीसी को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों के हित और बेहतर शैक्षणिक माहौल पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर कई स्तरों पर असमंजस की स्थिति है और संभावित टकराव की आशंका को देखते हुए इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
वहीं पार्षद छोटू सिंह ने कहा कि प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर लोगों के बीच चिंता और भ्रम की स्थिति है। उन्होंने लोगों को जागरूक करने और संबंधित मंचों तक अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आगे भी बैठकें और विचार-विमर्श जारी रहेगा।
बैठक में मौजूद लोगों ने शिक्षा से जुड़े नीतिगत फैसलों पर व्यापक संवाद और सभी पक्षों की राय को महत्व देने की मांग की। साथ ही आगे की रणनीति तय करने के लिए लगातार संपर्क और विचार-विमर्श जारी रखने पर सहमति बनी।
















