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19 सितंबर की संविधान बचाओ महारैली को लेकर तैयारियां तेज, धनबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपील

JP Bharat Shareधनबाद: 19 सितंबर को प्रस्तावित संविधान बचाओ महारैली को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बुधवार को संविधान बचाओ संघर्ष समिति की ओर से सर्किट हाउस परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रैली के उद्देश्यों और तैयारियों की जानकारी दी गई। समिति के सदस्यों ने एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के लोगों…

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धनबाद: 19 सितंबर को प्रस्तावित संविधान बचाओ महारैली को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बुधवार को संविधान बचाओ संघर्ष समिति की ओर से सर्किट हाउस परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रैली के उद्देश्यों और तैयारियों की जानकारी दी गई।

समिति के सदस्यों ने एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के लोगों से बड़ी संख्या में महारैली में शामिल होने की अपील की। समिति ने बताया कि रैली में युवाओं और छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

आरक्षण और यूजीसी से जुड़े मुद्दे उठाने की बात

समिति के गोपाल यादव ने कहा कि महारैली के माध्यम से एससी, एसटी और ओबीसी समाज से जुड़े मुद्दों को एक मंच पर उठाने का प्रयास किया जा रहा है।

दिलीप राम ने एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 85 प्रतिशत करने की मांग रखी। उन्होंने आबादी के अनुपात में भागीदारी की मांग के साथ EWS आरक्षण को समाप्त करने की बात भी कही।

देबू महतो और जेपी यादव ने UGC से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कही। वहीं, बबलू दास और मंटू दास ने आरक्षण को सामाजिक अधिकार बताते हुए इससे जुड़े बदलावों का विरोध करने की बात कही।

जिला परिषद मैदान से रणधीर वर्मा चौक तक मार्च

मुम्ताज कुरैशी ने बताया कि 19 सितंबर को एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के लोग जिला परिषद मैदान से रणधीर वर्मा चौक तक मार्च करेंगे।

समिति ने महारैली में हजारों लोगों के शामिल होने का दावा किया है। वहीं, शिवालक पासवान समेत अन्य सदस्यों ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिलीप राम, गोपाल यादव, शशिभूषण कुमार, शिवालक पासवान, देबू महतो, जेपी यादव, मंटू दास, बबलू दास, पिंटू तुरी, सुनील कुमार यादव, शंभु पासवान, जगदीश साव, रणधीर कुमार, अनुप साव, मनोहर दास और रंजीत दास समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

नोट: आरक्षण, EWS और UGC से जुड़ी मांगें समिति के पदाधिकारियों के बयान/दावे हैं। इन्हें आधिकारिक नीति या न्यायालय के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।


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