धनबाद: झरिया–बलियापुर मुख्य मार्ग पर मोहरीबांध के समीप सड़क धंसने की घटना को लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन आज तक मार्ग को पूरी तरह दुरुस्त कर आम लोगों के लिए चालू नहीं किया जा सका है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस सड़क के धंसने के बाद प्रशासन, पथ निर्माण विभाग और बीसीसीएल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क धंसने के बाद जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, जबकि सबसे अधिक परेशानी आम जनता को झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि समय पर समुचित कार्रवाई होती तो सड़क को इतने लंबे समय तक बंद रखने की नौबत नहीं आती।
सड़क बंद होने के बाद तैयार किए गए वैकल्पिक मार्ग को भी लोग अस्थायी और अव्यवस्थित बता रहे हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार मिट्टी और डस्ट डालकर बनाए गए रास्ते पर बारिश के दौरान कीचड़ फैल जाता है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को रोजाना जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बीसीसीएल क्षेत्र होने के कारण मरम्मत और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में लगातार देरी हुई। वहीं जिला प्रशासन भी अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाल सका है। धंसे हुए हिस्से के आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और बैरिकेडिंग नहीं होने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण और चौड़ीकरण किया गया था। यह मार्ग झरिया, बलियापुर तथा पश्चिम बंगाल की ओर आने-जाने वाले हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है। लेकिन सड़क धंसने के बाद विकास और बुनियादी ढांचे को लेकर किए गए दावों पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और बीसीसीएल से मांग की है कि सड़क मरम्मत कार्य में तेजी लाई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया। लोगों का कहना है कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना संभव नहीं होगा।














