धनबाद। शहर में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिरसा मुंडा पार्क के सामने करीब ₹5 करोड़ की लागत से तैयार सांस्कृतिक भवन इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसका ऑनलाइन उद्घाटन किया था, लेकिन उद्घाटन के करीब दो साल बाद भी भवन का नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है।
बताया गया कि इस भवन में करीब 500 लोगों के बैठने की क्षमता है। इसके अलावा 12 कमरे और विभिन्न सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। उम्मीद थी कि भवन के शुरू होने से धनबाद में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को एक बेहतर मंच मिलेगा।
लेकिन संचालन शुरू नहीं होने के कारण भवन की देखरेख को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौजूदा स्थिति में मुख्य द्वार का कांच टूट चुका है, जबकि कई जगहों पर प्लास्टर भी झड़ने लगा है। करोड़ों रुपये की लागत से बने भवन में महज दो वर्षों के भीतर इस तरह की स्थिति सामने आने से निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर चर्चा शुरू हो गई है।
उद्घाटन के बाद भी संचालन क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वर्ष 2024 में भवन का उद्घाटन हो चुका था, तो इसे अब तक आम लोगों और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए नियमित रूप से क्यों नहीं खोला गया। दो वर्षों तक संचालन में देरी की वजह क्या रही और इस दौरान भवन की देखरेख की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की थी, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
नगर आयुक्त ने कहा- अभी निगम को हैंडओवर नहीं हुआ भवन
मामले को लेकर नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने बताया कि सांस्कृतिक भवन से संबंधित प्रस्ताव नगर निगम की बोर्ड बैठक में पारित किया जा चुका है। लिए गए निर्णय के अनुसार आगे की प्रक्रिया की जा रही है।
उन्होंने बताया कि भवन के संचालन और आवश्यक कार्यों को लेकर जल्द टेंडर जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। नगर आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल भवन नगर निगम को औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं हुआ है।
उनके अनुसार, हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भवन के संचालन, रखरखाव और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर नगर निगम की ओर से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राशि से तैयार इतनी बड़ी परिसंपत्ति का लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होना चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि यदि भवन का समय पर संचालन शुरू किया जाता तो इसका लाभ शहर के कलाकारों, सांस्कृतिक संगठनों और आम लोगों को मिल सकता था।
वहीं, भवन में जगह-जगह प्लास्टर झड़ने और मुख्य द्वार का कांच टूटने को लेकर निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि भवन अभी नगर निगम को औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं हुआ है, लेकिन दो साल पुराने भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसकी तकनीकी जांच और गुणवत्ता का आकलन कराए जाने की मांग भी उठ रही है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि भवन की हैंडओवर प्रक्रिया कब पूरी होती है और नगर निगम द्वारा प्रस्तावित टेंडर कब जारी किया जाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भवन की मौजूदा स्थिति की तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था की जाती है या नहीं।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह सांस्कृतिक भवन कब पूरी तरह शहरवासियों के लिए खुलेगा, इसका इंतजार अब भी बना हुआ है।
















