चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी स्थित करीब आठ दशक पुराने ACC सीमेंट प्लांट की बंदी के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है। लंबे समय से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे इस कारखाने के बंद होने से मजदूरों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों के सामने भी रोजी-रोटी की चुनौती खड़ी हो गई है।
प्रबंधन की ओर से 15 जून को नोटिस जारी कर 16 अगस्त से प्लांट को पूरी तरह बंद करने की घोषणा की गई थी। इससे पहले ही यहां उत्पादन गतिविधियां धीरे-धीरे बंद हो चुकी थीं। बताया गया कि 1 अप्रैल से सीमेंट उत्पादन ठप था, जबकि 3 मई को 15 मेगावाट क्षमता वाले कैप्टिव पावर प्लांट को भी बंद कर दिया गया। साइलो में मौजूद सीमेंट स्टॉक के कारण 11 मई तक डिस्पैच का काम जारी रहा।
स्थायी और ठेका कर्मचारियों पर पड़ा असर
प्लांट में 74 स्थायी कर्मचारियों में से केवल 8 कर्मचारियों को ACC की अन्य इकाइयों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी है। बाकी कर्मचारियों को वीआरएस दिया गया। वहीं करीब 1500 ठेका मजदूरों का सेटलमेंट पूरा होने के बाद 10 सितंबर से उनके प्लांट में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई।
फिलहाल बिजली, पानी और एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं को जारी रखने के लिए कुछ मजदूरों को दैनिक मजदूरी के आधार पर रखा गया है। इन कर्मचारियों को बोनस और पीएफ जैसी सुविधाएं नहीं मिलने की बात कही जा रही है।
दशकों पुराना सायरन भी हुआ खामोश
10 सितंबर से प्लांट में ड्यूटी और शिफ्ट की शुरुआत का संकेत देने वाला दशकों पुराना सायरन भी बंद हो गया। स्थानीय लोगों के लिए यह सायरन लंबे समय से झींकपानी की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा था। इसके खामोश होने को लोग प्लांट के एक लंबे औद्योगिक दौर के अंत के रूप में देख रहे हैं।
स्थानीय कारोबार पर भी असर
प्लांट बंद होने का असर प्रत्यक्ष रोजगार के अलावा आसपास के छोटे कारोबार पर भी पड़ने की आशंका है। परिवहन, होटल, किराना दुकानों और अन्य छोटे व्यवसायों से जुड़े लोगों की आय भी प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
रोजगार के अवसर कम होने के कारण कई मजदूर दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, स्थानीय लोगों और मजदूरों में सरकार से रोजगार और भविष्य को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग उठ रही है।
















