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पूर्वी टुंडी के लटानी बाजार में गणेशोत्सव की धूम, ढोल-नगाड़ों और महाआरती से गूंजा मंदिर परिसर

JP Bharat Shareपूर्वी टुंडी: धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी प्रखंड अंतर्गत लटानी बाजार स्थित शिव शक्ति मंदिर परिसर में सार्वजनिक गणेश पूजा के अवसर पर भक्तिमय माहौल देखने को मिला। रात्रि में पंडित हराधन भट्टाचार्य ने विधि-विधान के साथ भगवान श्रीगणेश की महाआरती कराई। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच हुई आरती में बड़ी संख्या में…

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पूर्वी टुंडी: धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी प्रखंड अंतर्गत लटानी बाजार स्थित शिव शक्ति मंदिर परिसर में सार्वजनिक गणेश पूजा के अवसर पर भक्तिमय माहौल देखने को मिला। रात्रि में पंडित हराधन भट्टाचार्य ने विधि-विधान के साथ भगवान श्रीगणेश की महाआरती कराई। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच हुई आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय गणेश’ के जयकारों से गूंज उठा।

क्यों कहलाते हैं श्रीगणेश ‘प्रथम पूज्य’?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने बालक गणेश को अपने द्वार पर पहरा देने और उनकी अनुमति के बिना किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं देने का आदेश दिया। उसी दौरान भगवान शिव वहां पहुंचे। माता की आज्ञा का पालन करते हुए गणेश जी ने भगवान शिव को अंदर जाने से रोक दिया।

मान्यता के अनुसार, दोनों के बीच विवाद बढ़ने पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर गणेश जी का शीश धड़ से अलग कर दिया। यह देखकर माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हुईं और उन्होंने अपने प्रचंड रूप धारण किए। इससे सृष्टि पर संकट उत्पन्न होने लगा।

सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवित करने का उपाय किया। मान्यता है कि एक गज यानी हाथी का शीश लाकर गणेश जी के धड़ पर लगाया गया, जिसके बाद वे पुनः जीवित हो गए।

इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया कि किसी भी शुभ, धार्मिक या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले सबसे पहले उनकी पूजा की जाएगी। इसी मान्यता के कारण भगवान श्रीगणेश को ‘प्रथम पूज्य’ कहा जाता है और शुभ कार्यों से पहले ‘ॐ श्री गणेशाय नमः’ का जाप किया जाता है।


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