धनबाद: IIT (ISM) धनबाद में शुक्रवार को छठे इंडियन नेशनल ग्राउंडवाटर कॉन्फ्रेंस (INGWC-2026) का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय यह सम्मेलन 25 और 26 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का फोकस जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में भूजल के रणनीतिक उपयोग, आकलन, निगरानी और प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर है।
कॉन्फ्रेंस का आयोजन IIT (ISM) के सिविल इंजीनियरिंग, एनवायरनमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग तथा मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग विभागों की ओर से Association of Global Groundwater Scientists (AGGS) के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन में शोधकर्ता, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भूजल संसाधनों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
भूजल प्रदूषण और अत्यधिक दोहन पर चर्चा
सम्मेलन में भूजल के बढ़ते प्रदूषण, अत्यधिक दोहन और कम होते रिचार्ज को प्रमुख चुनौतियों के रूप में चर्चा में रखा गया। आर्सेनिक, फ्लोराइड, औद्योगिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
विशेषज्ञों ने भूजल जैसे जटिल सिस्टम को समझने और उसके बेहतर प्रबंधन के लिए मैथेमेटिक्स, स्टैटिस्टिक्स, कंप्यूटिंग, डेटा साइंस और मॉडलिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं भूजल प्रबंधन को केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय वैज्ञानिकों, सरकारी एजेंसियों, किसानों, उद्योगों, शहरी निकायों और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया।
विभिन्न तकनीकी विषयों पर होंगे सत्र
कॉन्फ्रेंस के दौरान ग्राउंडवाटर असेसमेंट, मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट, ग्राउंडवाटर मॉडलिंग, सतही जल-भूजल अंतःक्रिया, प्रदूषकों का परिवहन, जलवायु परिवर्तन का जल संसाधनों पर प्रभाव और कृषि जल प्रबंधन समेत कई विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान AGGS की ओर से विभिन्न श्रेणियों में वैज्ञानिकों को सम्मानित किए जाने का कार्यक्रम भी रखा गया है। इसके अलावा विशेषज्ञों के कीनोट लेक्चर और समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
INGWC-2026 का उद्देश्य भूजल से जुड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रबंधन संबंधी मुद्दों पर शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और नीति से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाना है। �
















