धनबाद/बाघमारा। बाघमारा क्षेत्र के झींझीपहाड़ी पंचायत में बूढ़ा बाबा मंदिर के समीप तालाब में नहाने के दौरान 14 वर्षीय शीतल कर्मकार के गहरे पानी में डूबने की घटना से इलाके में मातम पसरा है। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण तालाब के पास जुटे और अपने स्तर पर बच्ची की तलाश शुरू की। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद जिला स्तर पर रेस्क्यू व्यवस्था और पंचायतों में उपलब्ध आपदा संसाधनों को लेकर भी सवाल उठे हैं।
घटना के बाद शीतल के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। परिवार की चीख-पुकार के बीच मां के बेहोश होने की बात सामने आई है। वहीं भाई बार-बार तालाब की ओर दौड़कर अपनी बहन को बाहर निकालने की कोशिश करता रहा। इस दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों की सफाई और जल संरक्षण के लिए कई जगह खुदाई कर उनकी गहराई बढ़ाई जा रही है। ऐसे में गहरे जलाशयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना भी जरूरी है। कुछ रिपोर्टों में झींझीपहाड़ी की घटना के संदर्भ में तालाबों में गहरे हिस्सों और सुरक्षा संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया गया है।
पंचायतों में आपदा प्रबंधन उपकरणों की जरूरत
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि किसी तालाब में अचानक कोई बच्चा या ग्रामीण डूब जाए तो शुरुआती कुछ मिनटों में बचाव के लिए पंचायत स्तर पर क्या व्यवस्था मौजूद है। रेस्क्यू रस्सी, सीढ़ी, लाइफ जैकेट, स्ट्रेचर, टॉर्च और फर्स्ट-एड जैसी बुनियादी सामग्री उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर तत्काल मदद शुरू की जा सकती है। झींझीपहाड़ी की घटना के बाद पंचायत स्तर पर ऐसी व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग उठ रही है।
धनबाद जिला परिषद की वेबसाइट पर बाघमारा प्रखंड में कई पंचायतों और तालाबों से जुड़े घाट निर्माण की योजनाएं दर्ज हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि ग्रामीण जलस्रोतों के आसपास आधारभूत सुविधाओं पर काम किया जा रहा है। ऐसे में सुरक्षा संबंधी इंतजामों को भी प्राथमिकता देने की जरूरत पर चर्चा तेज हुई है। �
















