धनबाद: ओडिशा तट के पास महानदी ऑफशोर बेसिन में ONGC की डीपवॉटर गैस खोज में IIT (ISM) धनबाद के पांच पूर्व छात्र भी शामिल रहे। इन एलुमनाई ने ड्रिलिंग, जियोलॉजी, प्रोडक्शन और अन्य तकनीकी कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालते हुए एक्सप्लोरेशन टीम में योगदान दिया।
ONGC ने 18 सितंबर को महानदी बेसिन के MN-DW18-1-H-D वेल में गैस मिलने की जानकारी दी थी। बताया गया कि यह ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत महानदी बेसिन में ONGC द्वारा ड्रिल किया गया पहला वेल है। करीब 1,623 मीटर की टारगेट डेप्थ तक ड्रिल किए गए इस वेल में 1,441 से 1,452 मीटर के बीच गैस मिली।
शुरुआती फ्लो टेस्ट में गैस फ्लो और रिजर्वायर प्रेशर को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। हालांकि, खोज की वास्तविक क्षमता और व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन आगे होने वाली अप्रेजल गतिविधियों के बाद ही किया जाएगा।
पांच एलुमनाई ने संभाली तकनीकी जिम्मेदारी
ONGC की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम में IIT (ISM) धनबाद के पांच पूर्व छात्र शामिल रहे। इनमें आसिफ एमवी और कुमार अंकित (B.Tech Petroleum Engineering), अनिल कुमार बधाई और बिबेकानंद बारिक (M.Sc. Tech Applied Geology) तथा अंकित चौधरी (B.Tech Mechanical Engineering) शामिल हैं।
इन पूर्व छात्रों ने डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन ऑपरेशन में ड्रिलिंग, जियोलॉजी और प्रोडक्शन से जुड़े अलग-अलग तकनीकी कार्य संभाले। ऐसे जटिल ऑपरेशन में पेट्रोलियम, जियोलॉजी, ड्रिलिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग से जुड़े विशेषज्ञों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होता है।
टीम के सामूहिक प्रयास का नतीजा
एलुमनाई ने इस उपलब्धि को किसी एक व्यक्ति की सफलता के बजाय ONGC की पूरी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम का सामूहिक प्रयास बताया। देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े विशेषज्ञों ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम में योगदान दिया।
IIT (ISM) से जुड़े इन पूर्व छात्रों ने अपने तकनीकी प्रशिक्षण और संस्थान से मिली सीख के लिए शिक्षकों और अपने अल्मा मेटर के प्रति आभार जताया। संस्थान ने भी अपने एलुमनाई और पूरी ONGC टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
‘समुद्र मंथन’ से डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा
महानदी ऑफशोर में हुई यह खोज भारत के डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन प्रयासों के संदर्भ में सामने आई है। ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य ऑफशोर एक्सप्लोरेशन में जोखिम और ड्रिलिंग लागत को कम करने के साथ घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज को प्रोत्साहित करना है।
















