नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। हालांकि, राष्ट्रपति से मिलने के लिए केवल 10 नेताओं को अंदर जाने की अनुमति दी गई, जबकि अन्य सांसदों ने विजय चौक पर धरना दिया।
प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमला
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने चुनाव में कथित वोट चोरी का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि पूरा देश जानता है कि वोट चोरी हो रहे हैं, जिसके सूत्रधार नरेंद्र मोदी हैं और अमित शाह तथा ज्ञानेश कुमार इसे लागू करने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने मुलाकात के दौरान इन आरोपों से इनकार नहीं किया है।
विपक्ष की मुख्य मांगें:
- इस्तीफा: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
- SIR पर रोक: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- नाम जोड़ना: ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नामों को दोबारा सूची में जोड़ा जाए।
संसद से सड़क तक प्रदर्शन
इस मार्च से पहले संसद के सेंट्रल हॉल में ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक के लगभग 150 सांसदों की बैठक हुई, जिसमें 16 अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने ‘ज्ञानेश, बस बहुत हुआ!’ लिखे पोस्टर दिखाए और ‘वोट चोरी’ के नारे लगाए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेन सेवाएं रद्द किए जाने पर सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त की गलतियों और सरकार के डर के माहौल ने लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया है।
















