धनबाद: बेलगड़िया पुनर्वास कॉलोनी के विस्थापित परिवारों के लिए रोजगार की दिशा में एक बड़ी पहल होने जा रही है। बीसीसीएल और आदित्य बिड़ला लाइफस्टाइल लिमिटेड (एबीएलएल) के बीच बेलगड़िया में कपड़ा उद्योग स्थापित करने को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इस परियोजना के शुरू होने से करीब 1100 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि हाल ही में बेंगलुरु में आदित्य बिड़ला समूह के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में फैक्ट्री स्थापना, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), कौशल विकास प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को जल्द शुरू करने पर सहमति बनी।
योजना के अनुसार कपड़ा उद्योग का संचालन Aditya Birla Group� की इकाई द्वारा किया जाएगा, जबकि बीसीसीएल भूमि और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य विस्थापित परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।
सीएमडी ने बताया कि भविष्य में बेलगड़िया को एक इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित करने की भी योजना है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय भी इस परियोजना को लेकर गंभीर है और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा टाटा सहित अन्य वस्त्र कंपनियों को भी क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित करने की तैयारी चल रही है।
बेंगलुरु दौरे के दौरान बीसीसीएल प्रतिनिधिमंडल ने Aditya Birla Fashion and Retail Limited (ABFRL)� की वस्त्र निर्माण इकाई का निरीक्षण भी किया। टीम ने वहां उत्पादन प्रणाली, औद्योगिक संचालन, कौशल विकास व्यवस्था और रोजगार सृजन मॉडल का अध्ययन किया। इसी अनुभव के आधार पर बेलगड़िया में उद्योग आधारित रोजगार मॉडल विकसित करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
बैठक में स्थानीय युवाओं को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करने, कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत बनाने और दीर्घकालिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि बेलगड़िया और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
यदि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरती है, तो यह बेलगड़िया पुनर्वास कॉलोनी के विस्थापित परिवारों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
















