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झरिया में कथित रिकवरी एजेंटों के उत्पीड़न के बाद व्यवसायी की मौत, परिजनों ने बैंक और एजेंटों पर लगाए गंभीर आरोप

JP Bharat Shareझरिया/धनबाद: झरिया थाना क्षेत्र के केला पट्टी, अशोक रोड स्थित एक व्यवसायी की कथित रूप से बैंक रिकवरी एजेंटों द्वारा किए गए मानसिक उत्पीड़न के बाद तबीयत बिगड़ने और इलाज के दौरान मौत हो जाने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सचिन केसरी के रूप में हुई है। घटना के बाद…

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झरिया/धनबाद:

झरिया थाना क्षेत्र के केला पट्टी, अशोक रोड स्थित एक व्यवसायी की कथित रूप से बैंक रिकवरी एजेंटों द्वारा किए गए मानसिक उत्पीड़न के बाद तबीयत बिगड़ने और इलाज के दौरान मौत हो जाने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सचिन केसरी के रूप में हुई है। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। परिजनों ने बैंक और रिकवरी एजेंटों पर गंभीर आरोप लगाते हुए झरिया थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

परिजनों के अनुसार, कुछ दिन पहले बैंक के 4 से 5 कथित रिकवरी एजेंट व्यवसायी की दुकान पर पहुंचे और बकाया ऋण की किस्त तत्काल जमा करने का दबाव बनाने लगे। आरोप है कि व्यवसायी द्वारा कुछ दिनों की मोहलत मांगने पर एजेंटों ने उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। परिजनों का यह भी आरोप है कि इस दौरान व्यवसायी की पत्नी के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।

परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद सचिन केसरी गहरे मानसिक तनाव में आ गए। इसी बीच उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे दुकान में ही बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें तत्काल झरिया के एक निजी नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने ब्रेन हैमरेज की आशंका जताते हुए बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर कर दिया। रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने सोमवार को दोबारा इलाके में पहुंचे दो कथित रिकवरी एजेंटों को पकड़ लिया और उन्हें झरिया पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने दोनों युवकों, जिनकी पहचान रूपेश कुमार और जय प्रकाश तिवारी के रूप में बताई जा रही है, से पूछताछ शुरू कर दी है।

मृतक के भाई विनोद केसरी ने झरिया थाना में बैंक और संबंधित रिकवरी एजेंटों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इधर, घटना के बाद स्थानीय व्यवसायियों और नागरिकों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ऋण वसूली की प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर होनी चाहिए और किसी भी परिस्थिति में किसी व्यक्ति के साथ अभद्र व्यवहार या मानसिक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।


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