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आदिवासी महिलाओं की प्रेरणा बनीं डॉ. बुधरी ताती, शिक्षा और स्वरोजगार से बदली हजारों जिंदगियां

JP Bharat Shareबस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की अलख जगाने वाली डॉ. बुधरी ताती आज आदिवासी समाज की प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी महिलाओं, बालिकाओं और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है। 15 सितंबर 1966 को बस्तर के हिरनार गांव…

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बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की अलख जगाने वाली डॉ. बुधरी ताती आज आदिवासी समाज की प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी महिलाओं, बालिकाओं और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है।

15 सितंबर 1966 को बस्तर के हिरनार गांव में एक साधारण परिवार में जन्मी डॉ. बुधरी ताती ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद समाज सेवा का मार्ग चुना। वर्ष 1981 में उन्होंने स्वामी सदा प्रेमानंद जी महाराज से दीक्षा प्राप्त की और बाद में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम तथा राष्ट्रीय सेविका समिति से जुड़कर सामाजिक कार्यों का प्रशिक्षण लिया।

वर्ष 1986 से उन्होंने बस्तर के दूरस्थ और वन क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने का अभियान शुरू किया। उन्होंने बारसूर क्षेत्र में महिला जागरूकता और सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखी तथा वर्ष 1990 में केवल 11 बालिकाओं के साथ एक छात्रावास की शुरुआत की। आज हिरनार में 50 से अधिक बालिकाओं के लिए निःशुल्क छात्रावास संचालित किया जा रहा है, जहां प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की व्यवस्था उपलब्ध है।

डॉ. बुधरी ताती ने महिला प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना कर हजारों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया है। उनके प्रयासों से अनेक महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं और समाज में सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। इसके अलावा उनके द्वारा संचालित बाल संस्कार केंद्रों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति की सीख भी दी जाती है।

आदिवासी समाज में शिक्षा, सामाजिक समरसता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में उनके योगदान को देशभर में सराहा गया है। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें भारतीय स्त्री शक्ति पुरस्कार, मिनीमाता पुरस्कार, रानी गैदिनलियू पुरस्कार, महात्मा ज्योतिबा फुले फेलोशिप पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की गई है।

आज डॉ. बुधरी ताती केवल एक समाजसेवी नहीं, बल्कि आदिवासी महिलाओं और बालिकाओं के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और बदलाव का प्रतीक बन चुकी हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और सेवा भाव से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।


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